facebookmetapixel
Advertisement
CBSE ने छात्रों को दी बड़ी राहत: अब सिर्फ ₹100 में होगा रीचेकिंग, अंक बढ़ने पर फीस होगी वापसPM मोदी की नीदरलैंड यात्रा में हुए 17 ऐतिहासिक समझौते, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी पर हुआ सौदाहोर्मुज संकट पर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रखा अपना पक्ष, कहा: जहाजों पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्यइबोला के दुर्लभ वायरस ने बढ़ाई पूरी दुनिया की चिंता, WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालSukhoi Su 57 बन सकता है वायु सेना का ब्रह्मास्त्र! स्क्वाड्रन की भारी कमी के बीच IAF के पास एकमात्र विकल्पवीडियोकॉन समूह को लेकर NCLAT का बड़ा फैसला: दोनों कंपनियों की दिवाला प्रक्रिया अब चलेगी अलग-अलगअंबुजा सीमेंट के विस्तार में देरी पर करण अदाणी ने माना: समूह की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं परियोजनाएंम्यूचुअल फंड में फिर लौटा निवेशकों का भरोसा, कमोडिटी ETF को पछाड़ आगे निकले ऐक्टिव इक्विटी फंडडिजिटल लेनदेन पर अब मिलेगा ‘रिस्क स्कोर’, साइबर ठगी और ‘म्यूल अकाउंट’ पर नकेल कसने की तैयारीरुपये पर दबाव जरूर मगर अभी 100 पार नहीं! जानकारों का दावा: अभी इसकी संभावना न के बराबर

SEBI regulations: डायरेक्ट प्लान के लिए खर्च रिटर्न का खुलासा करें फंड

Advertisement

फंड हाउसों से अपनी छमाही रिपोर्टों में एमएफ योजनाओं के डायरेक्ट और रेग्युलर प्लान, दोनों द्वारा दिए जाने वाले रिटर्न का भी खुलासा करने को कहा गया है।

Last Updated- November 05, 2024 | 9:40 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्युचुअल फंडों (एमएफ) के लिए अपने छमाही वित्तीय परिणामों में डायरेक्ट प्लान और रेग्युलर प्लान से संबंधित योजनाओं का अलग-अलग खुलासा करना अनिवार्य बनाया है। नियामक ने एक सर्कुलर में कहा है, ‘खुलासा योग्य व्यय में स्कीम के कुल व्यय के प्रकटीकरण के अलावा, डायरेक्ट और रेग्युलर प्लान के लिए कुल खर्च के लिए अलग-अलग जानकारी शामिल हो।’फंड हाउसों से अपनी छमाही रिपोर्टों में एमएफ योजनाओं के डायरेक्ट और रेग्युलर प्लान, दोनों द्वारा दिए जाने वाले रिटर्न का भी खुलासा करने को कहा गया है।

सेबी ने भारत में म्युचुअल फंडों के संगठन (एम्फी) को छमाही वित्तीय विवरणों के लिए मानकीकृत खुलासे किए जाने का निर्देश दिया है। नए मानक 5 दिसंबर 2024 से प्रभावी होंगे।

सर्कुलर में कहा गया है, ‘चूंकि डायरेक्ट योजना के निवेशकों से वितरण व्यय और कमीशन नहीं लिया जा सकता, इसलिए किसी भी योजना की डायरेक्ट योजना का व्यय अनुपात उसी योजना की रेग्युलर योजना की तुलना में कम होता है और इसलिए डायरेक्ट और रेग्युलर योजनाओं के रिटर्न भी अलग होते हैं।’

 

Advertisement
First Published - November 5, 2024 | 9:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement