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SEBI ने रेगुलेटरी फीस को लेकर उठाया बड़ा कदम, 18% तक लुढ़के बीएसई के शेयर

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बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि अनुमानित तथा प्रीमियम मूल्यों के बीच बड़े अंतर के कारण सेबी को बीएसई के नियामक शुल्क भुगतान में वृद्धि होगी।

Last Updated- April 29, 2024 | 3:45 PM IST
SEBI

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के बीएसई को प्रीमियम मूल्य के बजाय उसके विकल्प अनुबंधों के ‘‘अनुमानित मूल्य’’ के आधार पर शुल्क का भुगतान करने का निर्देश देने के बाद एक्सचेंज के अब अधिक नियामक शुल्क (Regulatory Fee ) चुकाने का अनुमान है।

भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (SEBI) के इस कदम के बाद बीएसई के शेयर (BSE Share) सोमवार को एनएसई (NSE) पर 18.64 प्रतिशत तक गिरकर 2,612.0 रुपये के निचले स्तर पर आ गए।

बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि अनुमानित तथा प्रीमियम मूल्यों के बीच बड़े अंतर के कारण सेबी को बीएसई के नियामक शुल्क भुगतान में वृद्धि होगी। यह विसंगति गणना पद्धति से उत्पन्न होती है, जिसमें अनुबंध के आकार को अंतर्निहित कीमत से गुणा करना शामिल है।

एक्सचेंज ने शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी सूचना में कहा, ‘‘ बीएसई को विकल्प अनुबंध के बजाय अनुमानित मूल्य पर विचार करते हुए सेबी को वार्षिक कारोबार के आधार पर नियामक शुल्क का भुगतान करने की सलाह दी जाती है।’’

सूचना में कहा गया, साथ ही एक्सचेंज को शेष अवैतनिक राशि पर 15 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ पिछली अवधि के लिए विभेदक नियामक शुल्क का भुगतान करने को कहा गया है। पत्र प्राप्त होने के एक महीने के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

सेबी के पत्र में उल्लेख किया गया कि डेरिवेटिव अनुबंधों की शुरुआत के बाद से बीएसई अनुमानित मूल्य के बजाय विकल्प अनुबंधों के लिए प्रीमियम मूल्य पर विचार करते हुए नियामक को वार्षिक कारोबार पर नियामक शुल्क का भुगतान कर रहा है। बीएसई ने रविवार को कहा कि वह वर्तमान में सेबी के पत्र में किए गए दावे की वैधता का मूल्यांकन कर रहा है।

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First Published - April 29, 2024 | 3:11 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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