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Q2 में मजबूत रही म्युचुअल फंड की ग्रोथ, इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में बढ़ा निवेश

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औसत एयूएम लगातार दूसरी तिमाही में 7 फीसदी की वृद्धि के साथ 77 लाख करोड़ रुपये के पार निकली

Last Updated- October 07, 2025 | 9:48 PM IST
Mutual Fund

घरेलू म्युचुअल फंड (एमएफ) उद्योग के परिसंपत्ति आधार में सितंबर तिमाही के दौरान भी वृद्धि जारी रही। इसकी वजह इक्विटी फंड निवेश में नए सिरे से बहाली और डेट व हाइब्रिड योजनाओं में निवेश की तेज रफ्तार रही। सितंबर तिमाही में उद्योग ने 77.1 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन किया। यह पिछली तिमाही के 72.1 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों से लगभग 7 फीसदी ज्यादा है।

सितंबर तिमाही के दौरान औसत प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में वृद्धि की रफ्तार पिछली तिमाही के बराबर ही रही जबकि शेयर बाजार इस दौरान थोड़ा सुस्त था। बेंचमार्क निफ्टी 50 सूचकांक दूसरी तिमाही में 3.6 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। पहली तिमाही में इसमें 8.5 फीसदी की वृद्धि हुई थी।

एयूएम वृद्धि दो वेरिएबल पर निर्भर करती है – नए निवेश की मात्रा और अंतर्निहित प्रतिभूतियों के मूल्यांकन पर बाजार की चाल का असर। मार्क-टू-मार्केट लाभ में कमी की भरपाई इक्विटी फंड निवेश में वृद्धि से कुछ हद तक हो गई। ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं ने दूसरी तिमाही के पहले दो महीनों में 76,133 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हासिल किया जबकि पहली तिमाही की पूरी अवधि में 66,869 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था।

म्युचुअल फंडों की इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश आया है जबकि उनका अल्पावधि का प्रदर्शन खराब रहा है। विशेषज्ञों ने इस मजबूत निवेश का श्रेय व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) को दिया है।

बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम ने कहा, रुपये की औसत लागत के प्रभाव के कारण अस्थिरता ने एसआईपी को एकमुश्त निवेश की तुलना में बेहतर रिटर्न देने में मदद की है। लार्ज कैप फंडों में एसआईपी निवेशकों को सितंबर 2025 को समाप्त एक वर्ष की अवधि में औसतन 4 फीसदी से अधिक का लाभ हुआ था जबकि निफ्टी 4.65 फीसदी नीचे था।

संयोग से सकल इक्विटी निवेश में एसआईपी की फंडों में हिस्सेदारी 60 फीसदी है। निवेशक मनोबल पर भी 1 वर्ष के कमजोर प्रदर्शन का खास असर नहीं हुआ है क्योंकि 3 साल का प्रदर्शन अभी भी मजबूत दोहरे अंकों का रिटर्न दिखा रहा है।

डेट और हाइब्रिड फंडों में निरंतर निवेश ने भी एयूएम में बढ़ोतरी की है। दूसरी तिमाही के पहले दो महीनों में डेट फंडों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसी अवधि में हाइब्रिड योजनाओं में 36,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश आया जबकि पैसिव फंडों को करीब 20,000 करोड़ रुपये का निवेश मिला।

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First Published - October 7, 2025 | 9:42 PM IST

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