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मिडकैप कंपनियों में फंडों का बढ़ रहा स्वामित्व

मार्च 2025 तक म्युचुअल फंडों के पास लगभग 40 स्मॉलकैप शेयरों (शीर्ष 250 स्मॉलकैप शेयरों में शामिल) में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी।

Last Updated- July 01, 2025 | 10:06 PM IST
Mutual Fund

म्युचुअल फंडों (एमएफ) ने विभिन्न बाजार सेगमेंटों में अपने स्वामित्व में बड़ी वृद्धि की है, लेकिन मिडकैप क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से ज्यादा वृद्धि हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि फंडों के स्वामित्व वाली करीब 20 फीसदी मिडकैप कंपनियों की संख्या मार्च 2022 में 9 थी जो बढ़कर मार्च 2025 तक 18 हो गई हैं। इसके विपरीत लार्जकैप शेयरों में मामूली वृद्धि देखी गई और इस दौरान ऐसी कंपनियों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो गई।  

मिडकैप क्षेत्र की चुनिंदा कंपनियों में फंडों के स्वामित्व में वृद्धि इस क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से जारी मजबूत निवेश की आवक के बीच हुई है जबकि मूल्यांकन दीर्घावधि औसत से ऊपर चल रहा है। मार्च 2025 तक निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक का 12 महीने का पिछला पी/ई अनुपात निफ्टी के 21.9 गुना की तुलना में 37 गुना के आसपास था।

अप्रैल 2022 से मार्च 2025 के बीच मिडकैप फंडों ने 7.4 लाख करोड़ रुपये के कुल ऐक्टिव इक्विटी फंड निवेश का 10 प्रतिशत (83,433 करोड़ रुपये) से अधिक हासिल किया। तीन साल में कुल निवेश आवक ऐक्टिव इक्विटी फंड श्रेणियों में तीसरी सबसे अधिक रही जो सेक्टोरल और स्मॉलकैप फंडों के बाद है। हालांकि, मिडकैप शेयरों में म्युचुअल फंडों का निवेश मिडकैप फंडों में कुल निवेश से काफी अधिक होने की संभावना है क्योंकि अन्य श्रेणियों – विशेष रूप से फ्लेक्सीकैप, मल्टीकैप, वैल्यू और फोकस्ड फंडों में निवेश का कुछ हिस्सा मिडकैप शेयरों में भी जाता है।

मिडकैप शेयरों की संख्या 150 है और इन शेयरों में फंडों के लगातार निवेश से इस सेक्टर के विस्तार की मांग बढ़ गई है। म्युचुअल फंड अधिकारियों ने हाल में एक कार्यक्रम में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के सामने इस बारे में अनुरोध किया था। यह अनुरोध पिछले तीन वर्षों में स्मॉलकैप शेयरों के आकार में तेज वृद्धि के बाद सामने आया है क्योंकि बाजार के मिड- और स्मॉलकैप सेगमेंट में तेज उछाल देखी गई है।

श्रीराम वेल्थ के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) और उत्पाद प्रमुख नवल कागलवाला ने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों द्वारा प्रबंधित परिसंपत्तियां (कुल ऐक्टिव इक्विटी संपत्तियों के प्रतिशत के रूप में) 48 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 65 प्रतिशत हो गई हैं। इस दौरान कंपनियों का आकार और दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2017 में मिडकैप के रूप में वर्गीकृत 150 कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (एमकैप) 8,500 करोड़ रुपये से 29,000 करोड़ रुपये के बीच था। दिसंबर 2024 तक मिडकैप कंपनियों का एमकैप 33,000 करोड़ रुपये से 99,500 करोड़ रुपये के बीच हो गया।’

मिडकैप स्वामित्व भी औसत आधार के हिसाब से बढ़ा है। मार्च 2025 तक फंडों के पास मिडकैप फर्मों में औसतन 10.6 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। लार्जकैप और स्मॉलकैप (शीर्ष 250 कंपनियों) के मामले में औसत स्वामित्व क्रमशः 9.3 प्रतिशत और 10.2 प्रतिशत के साथ कम था।

हाल के वर्षों में म्युचुअल फंडों का स्मॉलकैप शेयरों में भी स्वामित्व बढ़ा है और स्मॉलकैप फंडों में नए निवेश में मजबूती बरकरार है। लेकिन इस क्षेत्र में फंड प्रबंधकों की चुनौतियां अपेक्षाकृत कम हैं क्योंकि शेयरों की संख्या अधिक है। मार्केट कैप रैंकिंग में 250 से नीचे के सभी शेयरों को स्मॉलकैप के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लिक्विडिटी संबंधी चिंता के कारण फंडों का निवेश ज्यादातर शीर्ष 250-300 स्मॉलकैप शेयरों तक ही सीमित है।

मार्च 2025 तक म्युचुअल फंडों के पास लगभग 40 स्मॉलकैप शेयरों (शीर्ष 250 स्मॉलकैप शेयरों में शामिल) में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी। यह अध्ययन एनएसई-500 डेटा पर आधारित है। इसलिए, विश्लेषण में ऐसी कुछ कंपनियां छूट गई हैं जो इंडेक्स का हिस्सा नहीं हैं।

First Published - July 1, 2025 | 9:59 PM IST

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