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भारत-केंद्रित ऐक्टिव फंडों से फिर तेज निकासी, विदेशी निवेशकों का झुकाव ETF की ओर

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इलारा कैपिटल की नई ग्लोबल लिक्विडिटी ट्रैकर फ्लो रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक निवेशकों ने गैर-डॉलर सौदों में तेजी के बीच कमोडिटी और अन्य उभरते बाजारों में तेजी से निवेश बढ़ाया है

Last Updated- January 25, 2026 | 10:34 PM IST
microfinance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत-केंद्रित सक्रिय इक्विटी फंडों में कुछ समय के विराम के बाद बिकवाली का दबाव फिर से बढ़ गया है। इलारा कैपिटल की नई ग्लोबल लिक्विडिटी ट्रैकर फ्लो रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक निवेशकों ने गैर-डॉलर सौदों में तेजी के बीच कमोडिटी और अन्य उभरते बाजारों में तेजी से निवेश बढ़ाया है। 

20 नवंबर से 6 जनवरी के बीच छह सप्ताह की शांति के बाद भारत-केंद्रित फंडों से जनवरी में फिर से निकासी शुरू हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो हफ्तों में इन फंडों से लगभग 68 करोड़ डॉलर की शुद्ध निकासी हुई है। पिछले तीन सप्ताह में 32 करोड़ डॉलर और 36 करोड़ डॉलर निकाले गए हैं।

बिक्री मुख्य रूप से लॉन्ग-ओनली रणनीतियों पर केंद्रित रही है, जिनसे 64.5 करोड़ डॉलर की निकासी हुई। देशों के हिसाब से देखें तो लगभग 33 करोड़ डॉलर की निकासी के साथ लक्जमबर्ग के फंड बिकवाली में आगे रहे हैं। इसके बाद 17 करोड़ डॉलर के साथ जापान के फंड रहे। खास बात यह है कि जापानी फंडों से निकासी 14 सप्ताह में सबसे ज्यादा थी, जिससे नवंबर 2024 से लगातार दबाव का रुझान आगे बढ़ता दिखा है। 

इलारा ने बताया कि भारत में अमेरिकी निवेश मुख्य रूप से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) के जरिये है, जिन्होंने सक्रिय रूप से प्रबं​धित भारत-समर्पित रणनीतियों की तुलना में ज्यादा मजबूती दिखाई है। यह अंतर भारत में विदेशी पोर्टफोलियो आवंटन में बड़ा बदलाव दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत को तेजी से बॉटम-अप कनविक्शन ट्रेड के बजाय टॉप-डाउन एलोकेशन के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ जहां भारत-केंद्रित सक्रिय फंड लगातार निकासी का सामना कर रहे हैं, दूसरी तरफ वैश्विक उभरते बाजार (जीईएम) फंडों में मजबूत निवेश आ रहा है जो भारतीय इक्विटी में टैक्टिकल, इंडेक्स-आधारित आवंटन का समर्थन कर रहा है। इसममें समर्पित लॉन्ग-ओनली पार्टिसिपेशन की कमजोरी छिप जा रही है।

वैश्विक स्तर पर, एंटी-डॉलर थीम अभी भी मजबूती के साथ बरकरार है, जो जीईएम और कमोडिटी से जुड़ी परिसंपत्तियों में मजबूत प्रवाह में दिखती है। जीईएम फंडों ने सप्ताह के दौरान 8 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया। इससे पिछले सप्ताह इनमें 6.6 अरब डॉलर का निवेश आया था। यह जनवरी-मार्च 2023 के बाद सबसे मजबूत निवेश आने का दौर रहा है। 

कमोडिटी से जुड़े निवेश भी मजबूत हुए हैं, औद्योगिक जिंस और गोल्ड फंडों में लगातार आठ हफ्तों से पूंजी निवेश आ रहा है जबकि कमोडिटी इक्विटी फंडों में 6.5 अरब डॉलर का निवेश नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

इलारा ने कहा कि भारत-केंद्रित सक्रिय फंडों पर लगातार दबाव और उभरते बाजारों तथा जिंसों में मजबूत वैश्विक रिस्क-ऑन निवेश का संयोजन बताता है कि भारतीय इक्विटी में अल्पाव​धि में विदेशी भागीदारी ईटीएफ और इंडेक्स-केंद्रित रहने की संभावना है।

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First Published - January 25, 2026 | 10:34 PM IST

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