facebookmetapixel
Advertisement
Q1 Results: विप्रो की ग्रोथ सुस्त, टेक महिंद्रा का मुनाफा 28% बढ़ा; जियो फाइनैंशियल, BHEL और पीरामल फाइनैंस ने दिखाया दमER&D सेक्टर में LTTS का दमदार प्रदर्शन, KPIT की चेतावनी और Tata Elxsi के मार्जिन पर दबावमोबाइल PLI 2.0 और सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, डिक्सन और अंबर एंटरप्राइजेज को सबसे ज्यादा फायदा संभवबाजार नियामक सेबी ने नियमों में ढील दी, SIF डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ने की उम्मीददेश में 2030 तक होंगे 2.1 करोड़ से ज्यादा गिग वर्कर, हर साल बनेंगे लाखों रोजगार अवसरफर्राटा भर रहा देश का टूरिज्म सेक्टर, 2036 तक GDP में होगी 7% हिस्सेदारी; 6.35 करोड़ रोजगार सृजित होंगेपश्चिम एशिया तनाव से बढ़ा कच्चा तेल, FPI की भारतीय शेयरों में बिकवाली तेज; ₹7,443 करोड़ के बेचे शेयरसॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों के दौर में बदली ऑटो इंडस्ट्री की भर्ती, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपर्ट्स की बढ़ी मांगकेंद्र ने राज्यों के साथ मिलकर बनाई योजना, 189 अरब डॉलर के आयात का तैयार होगा विकल्पजापान की 200+ कंपनियों के CEO अगस्त में आएंगे यूपी, मैन्युफैक्चरिंग से ग्रीन हाइड्रोजन तक निवेश पर फोकस

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स ने इक्विटी में बढ़ाया निवेश, 1 साल में 42% से बढ़कर 55% तक पहुंचा एक्सपोजर

Advertisement

बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों ने हाल में इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया है और कई योजनाओं का अब 60 प्रतिशत से अधिक निवेश इक्विटी में है।

Last Updated- September 22, 2025 | 10:28 PM IST
Balanced Advantage Funds

बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों (बीएएफ) में इक्विटी आवंटन पिछले एक साल में बढ़ा है और अब अधिकांश योजनाओं में मुख्य रूप से इक्विटी में निवेश किया जा रहा है। ये फंड बाजार की स्थितियों के आधार पर इक्विटी और डेट के बीच बदलाव करते हैं। पिछले अगस्त में इक्विटी बाजार के मूल्यांकन में भारी वृद्धि के कारण बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों का शुद्ध इक्विटी निवेश उनके निचले स्तर पर पहुंच गया था क्योंकि उस समय रिस्क-रिवार्ड का संतुलन डेट की ओर हो गया था।

इस श्रेणी की शीर्ष पांच योजनाओं (एडलवाइस बीएएफ को छोड़कर जो एक अलग तरह का आवंटन मॉडल अपनाती हैं) का अगस्त के अंत में औसत शुद्ध इक्विटी निवेश 55.5 प्रतिशत था जो एक साल पहले के 42.8 प्रतिशत से अ​धिक है।

फंड्सइंडिया के वरिष्ठ शोध प्रबंधक जिराल मेहता ने कहा, ‘बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों ने हाल में इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया है और कई योजनाओं का अब 60 प्रतिशत से अधिक निवेश इक्विटी में है। यह बढ़ोतरी मॉडल आधारित संकेतों (मूल्यांकन और धारणाओं के आधार पर) और बाजार की उम्मीदों में बदलाव दोनों को दर्शाती है, जिसमें मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के साथ निरंतर वृद्धि की उम्मीद शामिल है।’

हालांकि इन फंडों के पास इक्विटी और डेट के बीच सही संतुलन तय करने के लिए अलग-अलग मॉडल हैं। लेकिन ज्यादातर मॉडलों में एक मुख्य पैरामीटर इक्विटी मूल्यांकन है। टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ-इक्विटी) राहुल सिंह के अनुसार इक्विटी मूल्यांकन में गिरावट इक्विटी आवंटन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण रही है।

उन्होंने कहा, ‘तीन या छह महीने पहले की तुलना में आज के कम पीई रेश्यो को ध्यान में रखते हुए इक्विटी आवंटन बढ़ाया गया है। दूसरा, मॉडल में टेक्निकल और मोमेंटम फैक्टर के आधार पर स्कोरिंग भी शामिल है जो अभी भी ठीक-ठाक पॉजिटिव बनी हुई है। इन दोनों फैक्टरों के संयोजन ने हमें फंड में इक्विटी का हिस्सा बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।’

पिछले एक साल में इक्विटी बाजार में कीमत और समय दोनों में गिरावट देखी गई है। इस दौरान निफ्टी 500 का पिछले 12 महीने का पीई रेश्यो 27.2 से घटकर 24.3 रह गया। बाजार की स्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता के कारण हाल के वर्षों में ऊंचे इक्विटी मूल्यांकन और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों सहित हाइब्रिड फंड सबसे ज्यादा पसंदीदा निवेश विकल्प रहे हैं। कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों को सदाबहार और अच्छा निवेश विकल्प माना जाता है।

शेयर डॉट मार्केट (फोनपे वेल्थ) के प्रमुख (इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स) नीलेश डी नाइक ने कहा, ‘बाजार की स्थिति कैसी भी हो, ये फंड उन सतर्क निवेशकों के लिए अच्छा निवेश विकल्प है जो इक्विटी की दीर्घाव​धि बढ़ोतरी की संभावना में हिस्सा लेना चाहते हैं और साथ ही अल्पाव​धि जोखिम भी कम करना चाहते हैं। निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक व्यवहार संबंधी पूर्वग्रहों से बचना है। बैलेंस्ड एडवांटेज फंड ऐसे पूर्वग्रहों को दूर करने में मदद करते हैं क्योंकि उनके आवंटन निर्णय आमतौर पर पहले से तय ऐसेट आवंटन मॉडल पर आधारित होते हैं, जिनमें विकास और मूल्यांकन स्तर जैसे विभिन्न पैरामीटर शामिल हैं।’

कुछ महीने पहले तक इक्विटी में कम निवेश होने से बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों को सकारात्मक रिटर्न मिला जबकि अधिकांश इक्विटी फंडों का रिटर्न नकारात्मक रहा था। एक साल की अवधि में उन्होंने औसतन 3 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

Advertisement
First Published - September 22, 2025 | 10:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement