चीन में कोविड के कारण पाबंदियां लगाए जाने की आशंका देखकर निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से किनारा कर रहे हैं। इसके कारण बेंचमार्क सूचकांकों में आज गिरावट दर्ज की गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 518 अंक के नुकसान के साथ 61,145 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 147 अंक नीचे 18,160 पर बंद हुआ। पिछले हफ्ते सेंसेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था और निफ्टी सर्वकालिक उच्च स्तर से आधा फीसदी पीछे ही रहा था। इस समय दोनों सूचकांक अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से करीब दो फीसदी नीचे चले गए हैं।
अवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘नकारात्मक खबरों से कुछ मुनाफावसूली हुई है। देसी बाजार में अच्छी तेजी है, लेकिन वैश्विक बाजारों में थोड़ी सुस्ती देखी जा रही है।’
चीन में शनिवार को कोविड से 6 महीने बाद पहली मौत हुई थी और रविवार को भी दो लोगों के मरने की खबर है। चीन में कोविड की स्थिति से निवेशक असमंजस में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि कोविड के हालिया मामलों से यह चिंता बढ़ गई है कि मौत के आंकड़ों को काबू में करने के लिए चीन फिर से सख्त पाबंदियां लगा सकता है। चीन में सख्त लॉकडाउन और वहां के रियल एस्टेट बाजार में नरमी से भी वैश्विक आर्थिक चिंता बढ़ गई है। उधर ब्याज दरों में बढ़ोतरी और यूरोप में भू-राजनीतिक तनाव से भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव देखा जा रहा है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने से रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर आज 1.8 फीसदी गिर गया। आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में भी 1.6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। इन दोनों बड़े शेयरों का सूचकांक की गिरावट में बड़ा हाथ रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने आज करीब 1,600 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली की मगर देसी संस्थागत निवेशकों ने करीब 1,300 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों से रकम का आना या जाना फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्योरे और फेड अधिकारियों के बयानों पर निर्भर करेगा क्योंकि उनसे दरों में बढ़ोतरी के बारे में संकेत मिल सकते हैं। पिछले हफ्ते फेडरल रिजर्व ऑफ अटलांटा के अध्यक्ष राफेल बोस्टिक ने कहा कि वह दरों में धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी करना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके ख्याल से दरों में 100 आधार अंक का इजाफा और होना चाहिए।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस महीने की शुरुआत में लगातार चौथी बार दरों में 75 आधार अंक का इजाफा किया था। नीति निर्माताओं ने दिसंबर मध्य में दरों में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी और होने के संकेत दिए हैं, जो आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इधर मांग में नरमी आने की चिंता से तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है।
जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘कच्चे तेल के दाम में तेज गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है। लेकिन वैश्विक बाजारों में अड़चनों के कारण देसी बाजार में भी तेल के दाम घटने का सकारात्मक असर नहीं दिखा।’ किंतु कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में तेजी के बाद हालिया गिरावट थोड़ी मुनाफावसूली की वजह से आई है।
अक्टूबर के निचले स्तर से बेंचमार्क निफ्टी करीब 8 फीसदी चढ़ चुका है। रेलिगेयर ब्रोकिंग में उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्र ने कहा, ‘सभी क्षेत्रों में मिला-जुला असर दिखा, लेकिन बैंकिग में मजबूती दिखी, जिसने नुकसान सीमित करने में अहम भूमिका निभाई।