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Market Outlook: ग्लोबल रुख, FPI की गतिविधियों से तय होगी शेयर बाजार की दिशा

पिछले आठ कारोबारी सत्रों में BSE का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,644.6 अंक या 3.36% टूटा है। वहीं NSE का निफ्टी 810 अंक या 3.41% के नुकसान में रहा है।

Last Updated- February 16, 2025 | 10:58 AM IST
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Market Outlook: कंपनियों का तिमाही नतीजों का सीजन समाप्त होने के बाद इस सप्ताह स्थानीय शेयर बाजारों की दिशा वैश्विक रुख और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियों से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी कोषों की लगातार निकासी, कंपनियो के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों और वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध की आशंका से पिछले सप्ताह शेयर बाजारों की धारणा प्रभावित हुई। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार आठवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के प्रमुख-शोध, संपदा प्रबंधन सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘तीसरी तिमाही के नतीजों का सीजन समाप्त होने के साथ अब बाजार की निगाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों की वजह से पैदा हुए हालात और वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी।’’ इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और ब्रेंट कच्चे तेल के दाम भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘तिमाही नतीजों का सीजन समाप्त होने के साथ अब बाजार की निगाह आगे के संकेतों के लिए एफपीआई के प्रवाह और मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर रहेगी। इसके साथ ही अमेरिकी शुल्क और वैश्विक व्यापार पर इसका प्रभाव भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।’’ सप्ताह के दौरान फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक का ब्योरा भी जारी किया जाएगा।

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एंजल वन लिमिटेड के वरिष्ठ विश्लेषक – तकनीकी और डेरिवेटिव्स ओशो कृष्णन ने कहा, ‘‘घरेलू मोर्चे पर घटनाक्रमों के अभाव में वैश्विक रुझान बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।’’ पिछले आठ कारोबारी सत्रों में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,644.6 अंक या 3.36 प्रतिशत टूटा है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 810 अंक या 3.41 प्रतिशत के नुकसान में रहा है।

मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा, ‘‘बाजार में कई कारणों से गिरावट आई है। इसमें प्रमुख कारक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा व्यापारिक भागीदार देशों पर ऊंचा शुल्क लगाने की घोषणा है। इसके अलावा कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों तथा विदेशी निवेशकों की सतत निकासी से भी बाजार धारणा प्रभावित हुई है।’’

First Published - February 16, 2025 | 10:58 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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