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NSDL IPO: निवेशकों से मिला जबरदस्त रिस्पांस, 41 गुना सब्सक्रिप्शन, ₹1.1 लाख करोड़ की मिली बोलियां

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इश्यू के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर (QIB) हिस्से को 104 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) हिस्से को 35 गुना और रिटेल हिस्से को करीब 8 गुना।

Last Updated- August 01, 2025 | 8:58 PM IST
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NSDL IPO: देश की सबसे बड़ी डिपॉजिटरी नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आईपीओ को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। आईपीओ में आए बिड्स ऑफर किए गए शेयरों से 40 गुना से भी ज्यादा रहे और कुल बिड्स ₹1.1 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गईं। इश्यू के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर (QIB) हिस्से को 104 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) हिस्से को 35 गुना और रिटेल हिस्से को करीब 8 गुना।

NSDL IPO का साइज ₹4,000 करोड़

₹4,000 करोड़ का यह आईपीओ पूरी तरह से सेकेंडरी शेयर सेल था, जिसमें हिस्सेदारी बेचने वाले छह संस्थान शामिल थे—आईडीबीआई बैंक, एनएसई, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई। कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए ₹760 से ₹800 का प्राइस बैंड तय किया है। टॉप-एंड पर इश्यू साइज के हिसाब से NSDL का वैल्यूएशन लगभग ₹16,000 करोड़ होता है।

डिपॉजिटरी फर्में—जो शेयर और अन्य सिक्योरिटीज को डीमैट अकाउंट्स में रखने की सुविधा देती हैं—मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) मानी जाती हैं। यह सेक्टर एक डुओपॉली बिजनेस है, जिसमें दूसरी कंपनी सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड – CDSL है, जिसका मौजूदा वैल्यूएशन ₹30,972 करोड़ है।

Also Read: Tata Power Q1FY26 Result: मुनाफा 6% बढ़कर ₹1,262 करोड़ पर पहुंचा, रेवेन्यू भी बढ़ा

NSDL के पास 4.05 करोड़ डीमैट अकाउंट्स

जून के अंत तक NSDL के पास 4.05 करोड़ डीमैट अकाउंट्स थे, जिनकी कस्टडी वैल्यू ₹512 लाख करोड़ थी। वहीं, CDSL के पास 15.9 करोड़ अकाउंट्स थे, जिनकी कस्टडी वैल्यू ₹79 लाख करोड़ रही।

NSDL की प्राइसिंग उसके FY25 अर्निंग्स के करीब 47 गुना पर हुई है जो CDSL से डिस्काउंट पर है। वहीं CDSL फिलहाल 68 गुना पर ट्रेड कर रहा है।

एनालिस्ट्स का कहना है कि CDSL को बेहतर वैल्यूएशन इसलिए मिलता है क्योंकि उसकी रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ रेट ज्यादा है, मार्जिन बेहतर हैं और रिटेल सेगमेंट में उसकी पकड़ मजबूत है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि NSDL और CDSL दोनों का बिजनेस मॉडल यूनिक है, इनके पास रेग्युलेटरी मोअट है और ये घरेलू कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम की ग्रोथ पर खेलने वाले अहम कंपनियां हैं।

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First Published - August 1, 2025 | 8:50 PM IST

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