facebookmetapixel
वेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांगसमान अवसर का मैदान: VI को मिलने वाली मदद सिर्फ उसी तक सीमित नहीं होनी चाहिए1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता हैमनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बना, विकसित भारत-जी राम-जी मजदूरों के लिए बेहतर: शिवराज सिंह चौहानLNG मार्केट 2025 में उम्मीदों से रहा पीछे! चीन ने भरी उड़ान पर भारत में खुदरा बाजार अब भी सुस्त क्यों?उत्पाद शुल्क बढ़ते ही ITC पर ब्रोकरेज का हमला, शेयर डाउनग्रेड और कमाई अनुमान में भारी कटौतीमझोले और भारी वाहनों की बिक्री में लौटी रफ्तार, वर्षों की मंदी के बाद M&HCV सेक्टर में तेजीदक्षिण भारत के आसमान में नई उड़ान: अल हिंद से लेकर एयर केरल तक कई नई एयरलाइंस कतार में

क्या IPOs में सचमुच तेजी थी? 2025 में हर 4 में से 1 इश्यू में म्युचुअल फंड्स ने लगाया पैसा

म्युचुअल फंड भारत के आईपीओ इकोसिस्टम में सबसे अहम संस्थागत निवेशक के रूप में उभरे हैं। हालांकि, उनकी भागीदारी सभी इश्यू में एक जैसी नहीं रही है

Last Updated- December 30, 2025 | 5:57 PM IST
Mutual Funds IPO Investment

भारत का आईपीओ बाजार 2025 में भले ही “तेज” नजर आ रहा हो, लेकिन संस्थागत निवेशकों के रुझानों का विश्लेषण इससे कहीं ज्यादा स्थिर और परिपक्व तस्वीर पेश करता है। संस्थागत भागीदारी में संतुलन, पूंजी के अनुशासित उपयोग और निकासी के बजाय ग्रोथ के लिए फंडिंग की ओर स्पष्ट झुकाव देखने को मिला है। पैंटोमैथ प्राइमरी पल्स 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, म्युचुअल फंड भारत के आईपीओ इकोसिस्टम में सबसे अहम संस्थागत निवेशक के रूप में उभरे हैं। हालांकि, उनकी भागीदारी सभी इश्यू में एक जैसी नहीं रही है।

MFs ने सोच-समझकर चुनिंदा IPOs में किया निवेश

2025 में म्युचुअल फंड्स ने मेनबोर्ड के लगभग 26 फीसदी आईपीओ में एंकर निवेशकों के रूप में भाग लिया। एंकर निवेश में कुछ बड़े फंड हाउस ही सबसे आगे रहे। एसबीआई म्युचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचडीएफसी म्युचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया और कोटक महिंद्रा ने मिलकर कुल एंकर निवेश का लगभग 20 फीसदी लगाया। यहां तक कि सबसे एक्टिव म्युचुअल फंड्स ने भी पूरे साल में 35 से कम आईपीओ में ही एंकर निवेश किया। इससे साफ है कि संस्थागत निवेश सोच-समझकर और चुनिंदा इश्यू में ही किया गया।

Also Read: Year Ender 2025: हाइब्रिड कैटेगरी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स का जलवा, टॉप-5 फंड्स ने दिया 25% तक रिटर्न

रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ की संख्या बढ़ने के बावजूद टॉप- पांच म्युचुअल फंड्स ने औसतन केवल 28 आईपीओ में ही भागीदारी की, जो सतर्क और भरोसे पर आधारित निवेश रणनीति को दिखाता है।

2025 में म्युचुअल फंड एंकर निवेशक

रैंक एंकर निवेशक इश्यू की संख्या कुल राशि (₹ करोड़) कुल राशि का %
1 एसबीआई म्युचुअल फंड 23 2,924 4.9%
2 आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड 33 2,446 4.1%
3 एचडीएफसी म्युचुअल फंड 31 2,379 4%
4 निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड 25 1,881 3.1%
5 कोटक महिंद्रा म्युचुअल फंड 27 1,821 3%
6 आदित्य बिरला सन लाइफ म्युचुअल फंड 29 1,807 3%
7 एक्सिस म्युचुअल फंड 28 1,432 2.4%
8 मोतीलाल ओसवाल म्युचुअल फंड 39 1,304 2.2%
9 मिरे असेट म्युचुअल फंड 25 1,071 1.8%
10 टाटा म्युचुअल फंड 24 871 1.4%
11 फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्युचुअल फंड 17 748 1.2%
12 बंधन म्युचुअल फंड 35 710 1.2%
13 डीएसपी म्युचुअल फंड 16 685 1.1%
14 एडलवाइज म्युचुअल फंड 35 621 1%
15 व्हाइटओक कैपिटल म्युचुअल फंड 20 596 1%
16 एचएसबीसी म्युचुअल फंड 20 529 0.9%
17 इनवेस्को म्युचुअल फंड 15 513 0.9%
18 यूटीआई म्युचुअल फंड 14 468 0.8%
19 बड़ौदा बीएनपी परिबास म्युचुअल फंड 18 376 0.6%
20 कैनारा रोबेको म्युचुअल फंड 11 284 0.5%

स्रोत: पैंटोमैथ समूह का विश्लेषण | डेटा: नवंबर, 2025

Also Read: रिटायरमेंट अब नंबर-1 फाइनैंशियल जरूरत, तैयारी में भारी कमी; म्युचुअल फंड्स का यहां भी दबदबा

FPIs ने अपनाया और भी सर्तक रुख

2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारत के आईपीओ बाजार को वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता देना जारी रखा, लेकिन उनकी भागीदारी घरेलू संस्थानों की तुलना में और भी ज्यादा चयनात्मक रही। FPIs औसतन लगभग 18 फीसदी मेनबोर्ड आईपीओ में ही एंकर निवेशक बने। उनका निवेश मुख्य रूप से सॉवरेन वेल्थ फंड्स, ग्लोबल एसेट मैनेजर्स और अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंकों तक सीमित रहा।

2025 में एफपीआई एंकर निवेशक

रैंक एंकर निवेशक इश्यू की संख्या कुल राशि (₹ करोड़) कुल राशि का %
1 फिडेलिटी 15 1,499 2.5%
2 सिंगापुर सरकार 11 1,427 2.4%
3 गोल्डमैन सैक्स 26 1,406 2.3%
4 नॉर्गेस 18 1,334 2.2%
5 अशोक 26 1,236 2.1%
6 कैपिटल 9 1,213 2%
7 अबू धाबी इन्वेस्टमेंट 17 1,040 1.7%
8 नोमुरा 18 955 1.6%
9 प्रूडेंशियल 23 753 1.3%
10 ब्लैकरॉक 9 716 1.2%

स्रोत: पैंटोमैथ समूह का विश्लेषण | डेटा: नवंबर, 2025

फिडेलिटी, सिंगापुर सरकार, गोल्डमैन सैक्स, नॉर्गेस बैंक और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े नाम प्रमुख रूप से नजर आए, लेकिन इन दिग्गज निवेशकों ने भी सीमित संख्या में ही सौदों में भाग लिया। यह रुझान विकसित बाजारों की तरह ही है, जहां ग्लोबल पूंजी का योगदान कारोबार की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य निर्धारण की खोज और अनुशासन को मजबूत करता है।

यहां तक कि सबसे एक्टिव FPIs ने भी अपेक्षाकृत कम संख्या में आईपीओ में भागीदारी की। कुल मिलाकर, औसतन केवल 18 फीसदी मेनबोर्ड आईपीओ में ही FPIs की भागीदारी देखने को मिली।

Also Read: 2026 में डेट फंड में निवेश कैसे करें? ज्यादा रिटर्न के लालच से बचें, शॉर्ट और मीडियम-ड्यूरेशन फंड्स पर रखें फोकस

कंपनियां क्यों हो रही हैं लिस्ट?

आईपीओ से जुटाई गई राशि के उपयोग का तरीका बाजार की परिपक्वता का एक मजबूत संकेत देता है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कंपनियां पब्लिक मार्केट का इस्तेमाल मुख्य रूप से कारोबार को मजबूत और विस्तार देने के लिए कर रही हैं, न कि सिर्फ निकासी के लिए।

  • करीब 26 फीसदी आईपीओ राशि का इस्तेमाल विस्तार, नई परियोजनाओं और क्षमता बढ़ाने में किया गया।
  • लगभग 26 फीसदी राशि कर्ज चुकाने में लगी, जिससे बैलेंस शीट को मजबूत करने पर जोर दिखता है।
  • करीब 25 फीसदी फंड वर्किंग कैपिटल और रोजमर्रा की कामकाजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल हुआ।

अधिग्रहण, ब्रांडिंग और रिसर्च-डेवलपमेंट जैसे कामों में आईपीओ की राशि का कम इस्तेमाल हुआ। इससे पता चलता है कि कंपनियां आईपीओ को सिर्फ वित्तीय खेल के तौर पर नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने के साधन के रूप में देख रही हैं।

आईपीओ से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल देश की बड़ी जरूरतों के हिसाब से किया जा रहा है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना और सप्लाई चेन को बेहतर बनाना शामिल है। इससे साफ है कि शेयर बाजार से जुटाई गई पूंजी का सीधा असर जमीन पर चल रही अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

Also Read: Year Ender 2025: SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, 2025 में पहली बार ₹3 लाख करोड़ के पार

IPOs का पैसा कहां गया?

सेक्टोरल आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में आईपीओ से जुटाई गई कुल राशि का लगभग 30 फीसदी हिस्सा फाइनैंशियल सर्विसेज और इन्वेस्टमेंट सेक्टर से आया। इसमें एनबीएफसी, म्युचुअल फंड कंपनियां, बीमा कंपनियां और फाइनैंशियल प्लेटफॉर्म शामिल थे। इससे पता चलता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि में इस सेक्टर की अहम भूमिका है।

आईपीओ से फंड जुटाना कई अलग-अलग उद्योगों में नहीं बंटा। टॉप-13 सेक्टर्स ने मिलकर कुल इश्यू राशि का 80 फीसदी से ज्यादा योगदान दिया। इसका मतलब है कि निवेश सोच-समझकर और चुनिंदा सेक्टर्स में किया गया।

मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, ऑटो कंपोनेंट्स, सीमेंट और कंस्ट्रक्शन मटेरियल जैसे सेक्टरों में भी अच्छी भागीदारी रही। इससे साफ है कि देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

First Published - December 30, 2025 | 5:50 PM IST

संबंधित पोस्ट