facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

इंडेक्स ऑप्शन टर्नओवर 8 साल में पहली बार घटा

Advertisement

इंडेक्स ऑप्शंस का सालाना प्रीमियम टर्नओवर वित्त वर्ष 24 के 138 लाख करोड़ रुपये से घटकर 136 लाख करोड़ रुपये रह गया।

Last Updated- April 28, 2025 | 11:29 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर

डेरिवेटिव सेगमेंट में सट्टेबाजी और जुनून पर लगाम लगाने के लिए नियामक के कई कदम उठाने के कारण वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान आठ वर्षों में पहली बार इंडेक्स ऑप्शंस के सालाना प्रीमियम टर्नओवर में गिरावट आई है। एनएसई के आंकड़ों से पता चलता है कि इंडेक्स ऑप्शंस का सालाना प्रीमियम टर्नओवर वित्त वर्ष 24 के 138 लाख करोड़ रुपये से घटकर 136 लाख करोड़ रुपये रह गया। छोटी ही सही लेकिन यह तेज गिरावट ऑप्शन ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेजी से बढ़ोतरी के बाद आई है। इंडेक्स ऑप्शन प्रीमियम टर्नओवर में पिछले आठ वर्षों में 58 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।

सर्वेक्षणों के बाद (जिनमें वायदा और विकल्प में खुदरा ट्रेडरों के भारी घाटे के बारे में बताया गया था) सेबी ने कई कदम उठाए थे। इनमें प्रति एक्सचेंज एक बेंचमार्क तक साप्ताहिक एक्सपायरी को सीमित करना, अनुबंधों का आकार बढ़ाना तथा खरीदारों से विकल्प प्रीमियम का अग्रिम संग्रह शामिल था।

वित्त वर्ष 2025 की एनएसई की मार्केट पल्स रिपोर्ट के अनुसार पहले आठ महीनों के दौरान मासिक औसत प्रीमियम टर्नओवर 12.4 लाख करोड़ रुपये था जो शुरुआती नियामकीय बदलाव लागू होने से पहले था। दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक यह घटकर 9.1 लाख करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, स्टॉक ऑप्शन की ओर रुझान बढ़ा है और इसमें सालाना आधार पर 40 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है। सालाना कारोबार 20 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। हाल के महीनों में इक्विटी कैश सेगमेंट में रोजाना औसत कारोबार में गिरावट के बावजूद मार्च में औसत व्यापार के आकार में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में विदेशी निवेशकों की सहभागिता में बदलाव को भी उजागर किया गया है जिनकी इक्विटी फ्यूचर्स टर्नओवर में हिस्सेदारी 25 फीसदी से अधिक हो गई है जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 406 आधार अंक ज्यादा है। इक्विटी ऑप्शंस में यह हिस्सेदारी बढ़कर 9.6 फीसदी हो गई।

इक्विटी फ्यूचर्स में, खासतौर पर स्टॉक फ्यूचर्स में बढ़ोतरी ज्यादा रही, जहां विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 432 आधार अंक बढ़कर 28 फीसदी के पार चली गई जो अभी तक का उच्चतम सालाना स्तर है। इंडेक्स फ्यूचर्स में भी वित्त वर्ष 2025 में उनकी हिस्सेदारी सालाना आधार पर 105 आधार अंक बढ़कर 15 फीसदी हो गई।

Advertisement
First Published - April 28, 2025 | 10:48 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement