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सांठगांठ के मामले में अदालत पहुंची SAIL, CCI का भी दरवाजा खटखटाया

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उद्योग के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने नाम सार्वजनिक न करने के अनुरोध पर बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि कंपनी को सीसीआई से नोटिस मिला है, जिसमें सांठगांठ का संदेह जताया गया है

Last Updated- February 18, 2026 | 10:01 PM IST
SAIL

सरकारी कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने स्टील के क्षेत्र में कथित सांठगांठ के मामले में विस्तृत निष्कर्षों की मांग करते हुए अदालत और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) का दरवाजा खटखटाया है।

उद्योग के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने नाम सार्वजनिक न करने के अनुरोध पर बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि कंपनी को सीसीआई से नोटिस मिला है, जिसमें सांठगांठ का संदेह जताया गया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी को अभी तक उन तर्कों की विस्तृत जानकारी नहीं है, जिसके आधार पर नियामक ने निष्कर्ष निकाला है और सेल ने इस सामग्री को प्राप्त करने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा, ‘सीसीआई से अभी विस्तृत ब्योरा नहीं मिला है। ऐसे में गोपनीयता को लेकर एक घेरा बनाया जा सककता है। सेल ने न्यायालय और सीसीआई से संपर्क साधा है। उसके बाद सीसीआई विस्तृत सूचना प्रदान करेगा कि उसने किस आधार पर निष्कर्ष निकाला है। इसे देखने के बाद ही हम कुछ कह सकते हैं।’

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने पहले खबर दी थी कि सीसीआई की एक जांच में पाया गया है कि कुछ अन्य स्टील विनिर्माताओं के साथ टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल कथित तौर पर कीमतों के मामले में सांठगांठ करने के लिए प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौतों में शामिल हुए हैं।

न्यूज एसेंजी रॉयटर्स ने 6 जनवरी को एक रिपोर्ट में कहा था कि प्रतिस्पर्धा रोधी कानून के कथित उल्लंघन में 28 कंपनियों को लिप्त पाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में 2015 और 2023 के बीच अलग-अलग अवधि में कीमतों को लेकर सांठगांठ के लिए 56 वरिष्ठ अधिकारियों को भी उत्तरदायी ठहराया गया है। अधिकारी ने आगे कहा कि रिपोर्ट की जांच के बाद ही सेल ठोस जवाब देगी।

उन्होंने कहा, ‘जब तक हमें रिपोर्ट नहीं पता, वे उस निष्कर्ष पर कैसे पहुंच रहे हैं, टिप्पणी करना मुश्किल है।’ प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत कार्टेलाइजेशन या सांठगांठ को आपूर्ति को सीमित करने या बाजारों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिस्पर्धी उद्यमों के बीच समझौते के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर माना जाता है।

ऐसे समझौते अधिनियम की धारा 3 के तहत अमान्य हैं। अगर प्रतिस्पर्धा आयोग अपने निष्कर्षों पर बना रहता है तो कंपनियों व अधिकारियों पर प्रतिस्पर्धा कानून के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

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First Published - February 18, 2026 | 9:58 PM IST

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