facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

रेल पीएसयू में हिस्सा बेच सकती है सरकार, 4 साल में 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य!

Advertisement

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार कई चरण में बिक्री प्रस्ताव (ओएफएस) के जरिये इन पीएसयू में हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुन सकती है

Last Updated- February 18, 2026 | 10:50 PM IST
Disinvestment

सरकार अगले चार वित्त वर्षों (वित्त वर्ष 2027 से 2030) के दौरान रेल मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के 7 सूचीबद्ध उपक्रमों में अपनी थोड़ी हिस्सेदारी बेचकर करीब 80,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इस योजना से जुड़े तीन लोगों ने यह जानकारी दी।

नीति आयोग द्वारा परिसंपत्ति मुद्रीकरण पर कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में सचिवों के समूह के जरिये तय किए जा रहे परिसंपत्ति मुद्रीकरण लक्ष्यों के हिस्से के रूप में इस योजना पर चर्चा की गई थी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार कई चरण में बिक्री प्रस्ताव (ओएफएस) के जरिये इन पीएसयू में हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुन सकती है। अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘सरकार के लिए पूंजी जुटाने के लिए इनमें से कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी को घटाकर 51 फीसदी तक किया जा सकता है।’ इस बारे में जानकारी के लिए नीति आयोग और रेल मंत्रालय को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

रेलवे की सात पीएसयू में भारतीय रेल वित्त निगम (86.36 फीसदी), इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (62.4 फीसदी), रेल विकास निगम (72.8 फीसदी), इरकॉन इंटरनैशनल (65.17 फीसदी), रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (65.17 फीसदी), राइट्स (72.2 फीसदी) और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (54.8 फीसदी) शामिल हैं, जिनमें सरकार की बहुल हिस्सेदारी है।

पीएसयू में हिस्सेदारी की बिक्री राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी 2.0) के अगले दौर में रेलवे के लिए निर्धारित किए जाने वाले 2.5 लाख करोड़ रुपये के मुद्रीकरण लक्ष्य का एक हिस्सा है।

रेल मंत्रालय को केंद्रीय मंत्रालयों में दूसरा सबसे अधिक पूंजीगत व्यय का आवंटन किया गया है। मंत्रालय के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

बीते समय में केंद्र ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी 30.8 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर उसका निजीकरण करने की योजना की घोषणा की थी मगर छह वर्षों में इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। ईवाई इंडिया में पार्टनर और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीडर कुलजीत सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत सरकार के पास रेलवे की कई सूचीबद्ध इकाइयां हैं जिनका कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये है।

उन्होंने आगे कहा, ‘इनमें से अधिकांश पीएसयू में सरकार के पास 51 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है, जो परिचालन नियंत्रण के लिए आवश्यक है। यदि सरकार इन सभी पीएसयू में लगभग 20 फीसदी हिस्सेदारी बेचती है तो वह करीब 70,000 करोड़ रुपये जुटाने में सक्षम हो सकती है।’

वित्त वर्ष 2025-26 की आ​र्थिक समीक्षा में सरकार को कंपनी अधिनियम के तहत ‘सरकारी कंपनी’ की परिभाषा में संशोधन करने पर विचार करने की सिफारिश की गई है ताकि सूचीबद्ध पीएसयू को न्यूनतम 26 फीसदी सरकारी स्वामित्व के साथ भी सरकारी कंपनी का दर्जा बनाए रखने की अनुमति मिल सके और विनिवेश के माध्यम से ज्यादा इ​क्विटी का मुद्रीकरण किया जा सके।

Advertisement
First Published - February 18, 2026 | 10:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement