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Explainer: क्या है Trump Tariff? क्यों लगाया? कैसे वसूलेगा US दूसरे देशों से; जानें हर बात

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5 अप्रैल से सभी आयातित वस्तुओं पर 10% टैरिफ लगा है। 9 अप्रैल से अतिरिक्त शुल्क भी लागू होंगे।

Last Updated- April 09, 2025 | 10:29 PM IST
Trump tariffs

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ‘लिबरेशन डे’ नामक एक व्यापक टैरिफ नीति की घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका अब 180 से अधिक देशों से होने वाले आयात पर बगैर किसी अपवाद के शुल्क लगाएगा। इस नई नीति के तहत ट्रंप ने सभी आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का आधारिक टैरिफ लागू किया है, जो 5 अप्रैल से प्रभाव में आ जाएगा। इसके अलावा, 9 अप्रैल से अतिरिक्त शुल्क भी लागू होंगे।

इस नीति का उद्देश्य अन्य देशों द्वारा लगाए गए व्यापारिक अवरोधों का जवाब देना है। इस कदम के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

वैश्विक व्यापार व्यवस्था को संतुलित करने की कोशिश

नई टैरिफ नीति पूर्ववर्ती व्यापार रणनीतियों से एक बड़ा बदलाव है और इससे वैश्विक व्यापार धारा और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 54%, यूरोपीय संघ पर 20% और भारत पर 27% शुल्क लगाकर वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव की कोशिश की है। इन टैरिफ्स से फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, डेयरी, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे।

पहली बार नहीं है ट्रंप की टैरिफ रणनीति

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने आक्रामक व्यापारिक रुख अपनाया हो। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने चीन पर टैरिफ लगाए थे, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाया था। इसी नीति के चलते 2020 में अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) का पुनःमूल्यांकन हुआ था।

टैरिफ क्या होते हैं?

टैरिफ वह कर होता है जो किसी देश की सरकार दूसरे देशों से आयातित वस्तुओं और सेवाओं पर लगाती है। ये आमतौर पर वस्तु के मूल्य के प्रतिशत के रूप में (ad valorem) या प्रति यूनिट एक निश्चित राशि (specific) के रूप में वसूले जाते हैं।

टैरिफ क्यों लगाए जाते हैं?

घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए: आयात महंगे हो जाते हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ती है।
राजस्व अर्जन के लिए: टैरिफ से सरकार को अतिरिक्त आमदनी होती है।
व्यापार घाटा संतुलित करने के लिए: आयात कम कर व्यापार संतुलन सुधारा जा सकता है।
आर्थिक दबाव डालने के लिए: यह कूटनीति का एक तरीका भी हो सकता है।

टैरिफ के प्रकार

एड वेलोरम (Ad Valorem): वस्तु के मूल्य का प्रतिशत (जैसे, कारों पर 10%)
स्पेसिफिक (Specific): प्रति यूनिट तय शुल्क (जैसे, चीनी पर $5/किलोग्राम)
कंपाउंड टैरिफ: दोनों का मिश्रण
एंटी-डंपिंग टैरिफ: जब कोई वस्तु उसके बाजार मूल्य से कम दाम पर बेची जाती है
काउंटरवेलिंग ड्यूटी: विदेशी सब्सिडी को संतुलित करने के लिए
रिक्रिप्रोकल टैरिफ: जवाबी कार्रवाई के रूप में लगाए जाने वाले शुल्क

टैरिफ का भुगतान कौन करता है?

आयातकों को सीमा शुल्क पर यह शुल्क अदा करना पड़ता है, लेकिन इसका असर अंततः उपभोक्ताओं और कंपनियों पर पड़ता है:
उपभोक्ता: खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं
व्यवसाय: मुनाफा घट सकता है
निर्यातक: प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कीमतें घटानी पड़ सकती हैं
उत्पादन स्थानांतरण: कंपनियां उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट कर सकती हैं

अमेरिका इन टैरिफ्स को कैसे लागू करेगा?

सीमा शुल्क संग्रहण: 328 अमेरिकी पोर्ट्स पर HTSUS कोड के आधार पर टैरिफ लिया जाएगा
आयातक का आत्म-घोषण: कंपनियों को वस्तुओं का मूल्य, मात्रा और वर्गीकरण घोषित करना होगा
गलत जानकारी पर दंड: टैरिफ अधिनियम, 1930 की धारा 592 के तहत जुर्माना या आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है
फॉल्स क्लेम्स एक्ट: जानबूझकर टैरिफ चोरी करने पर भारी जुर्माना

किन वस्तुओं को छूट मिलती है?

पुनःआयातित अमेरिकी वस्तुएं: बिना बदलाव के लौटाई गईं वस्तुएं शुल्क-मुक्त होंगी
अमेरिकी मूल के घटकों वाली वस्तुएं: निर्माण विदेश में हुआ हो, फिर भी पूरा टैरिफ लिया जाएगा

भारत पर असर: 27% ‘डिस्काउंटेड रिक्रिप्रोकल टैरिफ’

भारत पर लगाए गए 27% टैरिफ को ‘डिस्काउंटेड रिक्रिप्रोकल टैरिफ’ कहा गया है। इसका अर्थ यह है कि यदि भारत अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर 54% टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका 27% का जवाबी शुल्क लगा सकता है।

यह नीति व्यापार घाटे को भी ध्यान में रखती है। अमेरिका उन देशों पर अधिक शुल्क लगाता रहा है, जिनके साथ उसका व्यापार घाटा अधिक है। इस नई नीति से अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार तनाव बढ़ने की संभावना है। भारत के लिए फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के निर्यात पर असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार और आपूर्ति शृंखलाएं पहले ही दबाव में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति वैश्विक आर्थिक वृद्धि और भू-राजनीतिक स्थिरता पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है।

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First Published - April 7, 2025 | 6:52 PM IST

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