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देसी इक्विटी बाजार अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से छूट पर कर रहा ट्रेड

विश्लेषकों के मुताबिक यील्ड के अंतर में तेज बढ़ोतरी भारतीय शेयरों के लिए तेजी का संकेतक होती है, लेकिन वैश्विक बाजारों के नकारात्मक संकेतों से यह पीछे रह गई।

Last Updated- August 05, 2024 | 9:45 PM IST
Bond Yield

हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार अब अमेरिका के 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड के यील्ड से छूट पर कारोबार कर रहा है। बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स अब 4.30 फीसदी के आय प्रतिफल पर ट्रेड कर रहा है जो 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के प्रतिफल से करीब 58 आधार अंक ज्यादा है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड अब फिसलकर 3.72 फीसदी पर चला गया है। यह पिछले 15 माह का सबसे निचला स्तर है।

इसकी तुलना में सेंसेक्स की आय का प्रतिफल पिछले साल सितंबर की शुरुआत के बाद से अमेरिकी बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल से कम रहा था। इस साल जून के आखिर में प्रतिफल का अंतर -0.31 फीसदी था और यह इस साल अप्रैल के अंत में -0.5 फीसदी के निचले स्तर को छू गया था।

विश्लेषकों के मुताबिक यील्ड के अंतर में तेज बढ़ोतरी भारतीय शेयरों के लिए तेजी का संकेतक होती है, लेकिन वैश्विक बाजारों के नकारात्मक संकेतों से यह पीछे रह गई। भारतीय शेयर और अमेरिकी जोखिम मुक्त दर के बीच यील्ड के अंतर में तीव्र बढ़ोतरी की वजह इक्विटी के मूल्यांकन में गिरावट और अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल का एकसाथ गिरना रहा।

सेंसेक्स का पिछले 12 महीने का पीई सोमवार को घटकर 23.2 गुना रह गया जो जुलाई के आखिर में 24.2 था और इस साल मार्च के आखिर में 52 हप्ते के उच्चस्तर 25.2 गुना पर पहुंच गया था। इंडेक्स का मौजूदा मूल्यांकन पिछले अक्टूबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर है जब यह गिरकर 22.35 गुना पर आ गया था।

अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और भी तेज रही है। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल अब फिसलकर 3.72 फीसदी पर चला गया है, जो इस साल जून के ​आखिर में 4.5 फीसदी था। अमेरिका में मौजूदा बॉन्ड प्रतिफल अब पिछले 15 महीने का निचला स्तर है।

भारतीय इक्विटी प्रतिफल और लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल के बीच सकारात्मक अंतर विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयरों में निवेश को आकर्षक बनाता है और इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक नई खरीदारी करते हैं और शेयर कीमतों में सुधार होता है।

विश्लेषकों को संदेह है कि यील्ड यानी प्रतिफल के अंतर में अचानक बढ़ोतरी से एफपीआई का नया निवेश आएगा क्योंकि वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता है।

सिस्टमैटिक्स इंस्टिट्यूशनल इक्विटी के उप-प्रमुख (शोध) धनंजय सिन्हा ने कहा कि इक्विटी में तेजी मुख्य रूप से तीन वजहों से आती है – कंपनियों की आय, जोखिम मुक्त दर यानी सॉवरिन बॉन्ड का प्रतिफल और बाजार का प्रीमियम या वोलैटलिटी इंडेक्स। अभी एक वजह जोखिम मुक्त दर या यील्ड स्प्रेड सकारात्मक जोन में है, वहीं अन्य दो मंदी के जोन में। शेयर कीमतों में तेजी के लिए कम से कम दो वजह सकारात्मक जोन में होनी चाहिए।

First Published - August 5, 2024 | 9:45 PM IST

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