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Decoded: फ्रंट-रनिंग कैसे काम करती है और केतन पारेख की भूमिका क्या है?

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फ्रंट-रनिंग एक धोखाधड़ी वाली प्रणाली है, जिसमें कारोबारी निजी लाभ के लिए बड़े ग्राहकों के ऑर्डरों की अग्रिम जानकारी का इस्तेमाल करते हैं।

Last Updated- January 03, 2025 | 10:30 PM IST
Decoded: How does front-running work, and what is Ketan Parekh's role? फ्रंट-रनिंग कैसे काम करती है और केतन पारेख की भूमिका क्या है?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार में हेरफेर करने के लिए कुख्यात केतन पारेख और सिंगापुर स्थित व्यापारी रोहित सालगांवकर से जुड़े एक फ्रंट-रनिंग घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच से पता चला है कि इस योजना ने एक प्रमुख अमेरिकी-आधारित विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) की गैर-सार्वजनिक जानकारी (एनपीआई) का गलत इस्तेमाल किया। एफपीआई को ‘बिग क्लाइंट’ यानी बड़े ग्राहक कहा गया है।

केतन पारेख की फ्रंट-रनिंग योजना कैसे सामने आई?

सेबी के निष्कर्ष के अनुसार, पारेख और सालगांवकर ने धोखाधड़ी वाले सौदों को अंजाम देने के लिए बिग क्लाइंट के बड़े शेयर लेनदेन के बारे में अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाया। सालगांवकर ने मुख्य बिचौलिए के तौर पर काम किया और पारेख को व्य​क्तिगत कारोबारी डेटा मुहैया कराया। उसके बाद इस डेटा का इस्तेमाल हेरफेर के साथ कारोबार करने में किया गया, जबकि 2001 के शेयर बाजार संकट में संलिप्त होने के बाद इन पर 14 वर्षों तक ट्रेडिंग करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इस ऑपरेशन में छह इकाइयां भी शामिल थीं, जिन्हें फ्रंटरनर्स कहा गया, जिन्होंने लीक हुई जानकारी के आधार पर ट्रेड किए। सेबी की जांच में नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड और मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज सहित बिचौलियों की पहचान की गई, जिनके माध्यम से बिग क्लाइंट के ट्रेड डेटा का दुरुपयोग किया गया।

1 जनवरी 2021 से 20 जून 2023 के बीच हुए इस घोटाले का पता सेबी को बिग क्लाइंट से संबं​धित असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न सामने आने के बाद लगा था। नियामक ने जून 2023 में 17 स्थानों पर तीन दिवसीय तलाशी और जब्ती अभियान चलाया तथा अपने मामले को पुष्ट करने के लिए दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए।

क्या है फ्रंट-रनिंग?

फ्रंट-रनिंग धोखाधड़ी वाली एक ऐसी प्रणाली है जिसमें कारोबारी अपने निजी फायदे के लिए बड़े ग्राहक ऑर्डरों की अग्रिम जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हैं। ब्रोकर, परिसंप​त्ति प्रबंधक या भेदिया कारोबारी गोपनीय व्यापारिक जानकारी तक पहुंच का फायदा उठाते हैं और इसका उपयोग पूर्व-निर्धारित ट्रेड करने के लिए करते हैं तथा ग्राहक के ऑर्डरों के कारण होने वाले बाद के मूल्य संबं​धित उतार-चढ़ाव से लाभ कमाते हैं।

सेबी फ्रंट-रनिंग की पहचान कैसे करता है?

फ्रंट-रनिंग और भेदिया कारोबार का पता लगाने के लिए सेबी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है, जिसमें एल्गोरिदम, डेटा एनालिटिक्स और कम्युनिकेशन सर्विलांस मुख्य रूप से शामिल हैं। अक्सर अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए म्यूल खातों का उपयोग किया जाता है, लेकिन नियामक ईमेल और मैसेजिंग ऐप जैसे डिजिटल संचार माध्यमों के जरिये ऐसे संपर्कों का पता लगाता है।

रडार पर अन्य फ्रंट-रनिंग मामले कौन से हैं?

केतन पारेख का मामला भारत के वित्तीय बाजारों में धोखाधड़ी वाली प्रणालियों पर सेबी की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। 2023 में, ऐक्सिस म्युचुअल फंड के प्रबंधक वीरेश जोशी और 20 अन्य को फ्रंट-रनिंग के जरिये 30.55 करोड़ रुपये कमाने के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया था। क्वांट म्युचुअल फंड को भी उसी साल इसी तरह के आरोपों का सामना करना पड़ा था।

एनएनएम सिक्योरिटीज लिमिटेड, सीएचएल स्टॉक्स कॉन्सेप्ट्स तथा वॉकहार्ट और बैंक ऑफ इंडिया एक्सा म्युचुअल फंड जैसी कंपनियों से जुड़े अन्य मामले मौजूदा समय में प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) द्वारा समीक्षाधीन हैं।

फ्रंट-रनिंग से कैसे निपट रहा है सेबी?

निगरानी को मजबूत बनाने और ऐसे मामलों को रोकने के लिए, सेबी ने म्युचुअल फंड नियमों में संशोधन किए हैं। इनमें बाजार खुलने के दौरान डीलरों और फंड प्रबंधकों द्वारा किए जाने वाले सभी संवाद की अनिवार्य रिकॉर्डिंग शामिल है। इसके अलावा, परिसपं​त्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को फ्रंट-रनिंग का पता लगाने और रोकने के लिए संस्थागत प्रणालियां तैयार करने की जरूरत होगी।

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First Published - January 3, 2025 | 10:30 PM IST

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