facebookmetapixel
Advertisement
चंद्रशेखरन के बाद टीसीएस के सामने नेतृत्व की नई चुनौती, टाटा समूह के साथ तालमेल पर भी नजरउदारीकरण के 35 साल: ‘एशिया के डेट्रॉइट’ से चेन्नई ने कैसे तय किया दुनिया के ऑटो हब तक का सफरअटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तराधिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशयभारत के एयर मोबिलिटी बाजार में उतरने की तैयारी, 2029 से ईवीटीओएल उड़ाने की स्काईड्राइव की योजनाMMDR विधेयक पर कुछ राज्यों को एतराज, खनन मंत्री बोले- प्रमुख खनिजों तक सीमित रहेंगे प्रावधानएयरटेल के ग्राहकों को महंगे प्लान में शिफ्ट करने से Vi को मिल सकता है मौका, बढ़ेगी कमाईस्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में फिर बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, हर 3 इक्विटी फोलियो में 1 इनकाआरबीआई के नए नियमों से कर्ज दरों में बदलाव होगा तेज, बैंकों के स्प्रेड पर भी पड़ेगा असरQ1 Results: ABREL का घाटा बढ़ा, IGL का मुनाफा 44% घटा; LG Electronics का लाभ 27% बढ़ाभारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग ने औद्योगिक पार्क और क्लस्टर का दिया सुझाव

बाजार में उथलपुथल के बाद अब स्थिति है बेहतर

Advertisement

सबसे तेज यानी 14 फीसदी की गिरावट 2001 में संसद पर हमले के दौरान हुई थी, जो मोटे तौर पर प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के कारण हुई थी।

Last Updated- May 11, 2025 | 11:06 PM IST
Share Market

भारत के शेयर बाजारों ने परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ 11 बार टकरावों को झेला है। लेकिन इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। आनंद राठी के अनुसार सबसे तेज यानी 14 फीसदी की गिरावट 2001 में संसद पर हमले के दौरान हुई थी, जो मोटे तौर पर प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों के कारण हुई थी। उस दौरान भारतीय शेयरों ने एसऐंडपी 500 से भी बेहतर प्रदर्शन किया। करगिल युद्ध के चरम पर भी कोई गिरावट नहीं हुई और एफपीआई ने दोनों घटनाओं के दौरान खरीदारी जारी रखी।  लेकिन मौजूदा तनाव, जिसमें खुले तौर पर दुश्मनी और आधुनिक हथियार दोनों शामिल हैं, उस मजबूती की परख कर सकता है।

स्थिर रहने के बाद शुक्रवार को बाजार डगमगा गया और सेंसेक्स और निफ्टी में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। एफपीआई ने 16 लगातार सत्रों में कुल 50,000 करोड़ रुपये की खरीद के बाद 3,800 करोड़ रुपये की बिकवाली की। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध विराम स्वागत योग्य राहत है, लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचता तो इसका प्रभाव वास्तविक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता था। 

 

 

Advertisement
First Published - May 11, 2025 | 11:06 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement