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भारत में बढ़ रहे स्तन कैंसर के मामले

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्तन कैंसर के मामले और इनसे होने वाली मौतों की संख्या भारत में बढ़ती ही जा रही है।

Last Updated- October 28, 2024 | 10:40 PM IST
Cancer

भारत में स्तन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि खास ताैर पर शहरी इलाकों में जीवन-शैली अव्यवस्थित होने और समय रहते जांच नहीं हो पाने के कारण देश में स्तन कैंसर और उससे होने वाली मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्तन कैंसर के मामले और इनसे होने वाली मौतों की संख्या भारत में बढ़ती ही जा रही है। अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता महीना घोषित किया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (एनआरसीपी) के आंकड़ों के हवाले से इस साल संसद में बताया है कि देश में स्तन कैंसर के मामले पिछले पांच वर्षों में 10.6 प्रतिशत बढ़ गए हैं। एनआरसीपी के आंकड़ों के अनुसार 2019 में स्तन कैंसर के 2,00,218 मामले सामने आए थे, जो 2023 में बढ़कर 2,21,579 तक पहुंच गए।

मंत्रालय ने कहा कि इसी अवधि में इस बीमारी से मौत के मामले भी 10.67 प्रतिशत (74,481 से बढ़कर 82,429) बढ़ गए हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि 2023 में स्तन कैंसर के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सामने आए।

भारत में इस बीमारी के बढ़ते मामलों पर राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र (आरजीसीआईआरसी) में वरिष्ठ चिकित्सक (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. पंकज गोयल ने कहा कि शहरीकरण, शिथिल जीवन-शैली और बढ़ते तनाव के कारण लोगों में कैंसर व स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां बढ़ रही हैं।

गोयल ने कहा, ‘पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी एक बड़ा कारण हैं। खाद्य पदार्थों खासकर दुग्ध उत्पादों में कृत्रिम हार्मोन की मौजूदगी और कीटनाशक एवं हानिकारक तत्व अनुवांशिक प्रवृत्ति में बदलाव लाकर कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं।‘

दिल्ली में सी के बिड़ला हॉस्पिटल में निदेशक, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने कहा कि अनुवांशिक प्रवृत्ति भी कैंसर का एक कारण होती है। वह कहते हैं, ’15 से 24 प्रतिशत मामले अनुवांशिक कारणों से जुड़े होते हैं जिनकी वजह से कम उम्र की महिलाओं में भी कैंसर के मामले दिखने लगते हैं।’

भारत में स्तन कैंसर के ज्यादातर मामले 45 से 55 वर्ष की महिलाओं में देखे गए हैं मगर चिकित्सकों का कहना है कि कम उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। वे इस जानलेवा बीमारी को लेकर लोगों को आगाह कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में अनियमित जीवन-शैली से युवा महिलाएं भी इस घातक बीमारी की शिकार हो रही हैं। उनके अनुसार महिलाएं शुरुआती या एहतियाती जांच भी कम कराती हैं और जब कैंसर का पता चलता है तब काफी देर हो चुकी होती है।

मल्होत्रा ने कहा,‘कई लड़कियों में काफी कम उम्र में माहवारी की शुरुआत हो जाती है जिससे एस्ट्रोजन का स्राव लंबे समय तक होने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्भ धारण करने में देरी, संतानोत्पत्ति नहीं करने और शिशुओं को स्तनपान कम कराने से भी शरीर की स्वाभाविक प्रतिरोध क्षमता कम हो जाती है।‘

उन्होंने कहा कि कैंसर का पता काफी बाद में चलता है जिससे इलाज बहुत कारगर नहीं हो पाता है। मल्होत्रा ने कहा, ‘स्तन कैंसर के 75 प्रतिशत से अधिक मामलों में इस गंभीर बीमारी का पता देर से लगता है (50 प्रतिशत मामले स्टेज 3 में और 25 प्रतिशत मामले स्टेज 4 में)। तब तक कैंसर शरीर में फैल चुका होता है । इससे जान बचने की उम्मीद काफी कम हो जाती है।’

दिल्ली के लाजपत नगर में मैक्स मेड सेंटर में मेडिकल ऑन्कोलॉजी में वरिष्ठ निदेशक डॉ. देवव्रत आर्य भारत में स्तन कैंसर की जानकारी और शुरुआती जांच के अभाव को बीमारी बढ़ने का बड़ा कारण मानते हैं।

डॉ. आर्य कहते हैं, ‘मरीज स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों जैसे स्तन में गांठ आदि की अनदेखी करते हैं जिनसे बाद में संभल पाना मुश्किल हो जाता है और जान चली जाती है। कई मरीज परिवार के सदस्यों, खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी बीमारियों के बारे में जिक्र नहीं करती हैं जिससे समय पर इलाज मुमकिन नहीं हो पाता है।

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First Published - October 28, 2024 | 10:21 PM IST

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