facebookmetapixel
दूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Update: हैवीवेट शेयरों में बिकवाली से बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक गिरा; निफ्टी 26,200 के पासStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

बिहार से लेकर गुजरात तक, आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों के छात्र बीच से ही छोड़ रहे पढ़ाई, 2030 तक केंद्र का है ये प्लान

कई जगहों पर यह भी पाया गया कि बच्चों ने स्कूल छोड़ने के बाद परिजनों के साथ मजदूरी या लोगों के घरों में सफाई करने का काम शुरू कर दिया

Last Updated- June 11, 2023 | 4:04 PM IST
One Nation One Student ID

देश के आधा दर्जन से अधिक राज्यों में माध्यमिक स्तर पर छात्रों के बीच में ही पढ़ाई छोड़ने यानी ‘ड्रॉपआउट’ की दर राष्ट्रीय औसत 12.6 प्रतिशत से अधिक है। इन राज्यों में बिहार, आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, मेघालय, पंजाब आदि शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इन राज्यों को ‘ड्रॉपआउट’ दर को कम करने के लिए विशेष कदम उठाने का सुझाव दिया है।

समग्र शिक्षा कार्यक्रम पर शिक्षा मंत्रालय के तहत परियोजना मंजूरी बोर्ड (PAB) की वर्ष 2023-24 की कार्य योजना संबंधी बैठकों के कार्यवृति दस्तावेजों (मिनट्स) से यह जानकारी मिली है। ये बैठकें अलग-अलग राज्यों के साथ मार्च से मई 2023 के दौरान हुईं।

सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लक्षित साल 2030 तक स्कूली शिक्षा के स्तर पर 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर (GER) हासिल करना चाहती है और बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ने को इसमें बाधा मान रही है।

PAB की बैठक के डॉक्यूमेंट के अनुसार, वर्ष 2021-22 में बिहार में स्कूलों में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 20.46 प्रतिशत, गुजरात में 17.85 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 16.7 प्रतिशत, असम में 20.3 प्रतिशत, कर्नाटक 14.6 प्रतिशत, पंजाब में 17.2 प्रतिशत, मेघालय में 21.7 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, इस अवधि में मध्य प्रदेश में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 10.1 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 12.5 प्रतिशत और त्रिपुरा में 8.34 प्रतिशत दर्ज की गई ।

डॉक्यूमेंट के मुताबिक, संबंधित अवधि में दिल्ली में स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर नामांकन में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि माध्यमिक स्तर पर नामांकन में करीब पांच प्रतिशत की गिरावट आई।

इसमें कहा गया कि दिल्ली में स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर काफी संख्या में छात्र हैं, ऐसे में शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाए गए छात्रों की संख्या के बारे में प्रदेश को ‘प्रबंध पोर्टल’ पर जानकारी अपलोड करनी चाहिए।

बैठक में मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में माध्यमिक स्कूली स्तर पर वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में ड्रापआउट दर में काफी सुधार दर्ज किया गया, हालांकि राज्य को छात्रों के बीच में पढ़ाई छोड़ने की दर को और कम करने के लिए पर्याप्त कदम उठाने चाहिए।

Also read: FSSAI ने कम अल्कोहल वाले रेडी टू ड्रिंक का तय किया पैमाना

डॉक्यूमेंट के अनुसार, महाराष्ट्र में माध्यमिक स्तर पर ड्रापआउट दर वर्ष 2020-21 के 11.2 प्रतिशत से बेहतर होकर वर्ष 2021-22 में 10.7 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि राज्य के पांच जिलों में ड्रापआउट दर 15 प्रतिशत या उससे अधिक है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वार्षिक औसत ड्रापआउट दर 15 प्रतिशत से अधिक रही जिसमें बस्ती में 23.3 प्रतिशत, बदायूं (19.1) , इटावा (16.9), गाजीपुर (16.6) , एटा (16.2), महोबा (15.6), हरदोई (15.6) और आजमगढ़ में यह 15 प्रतिशत दर्ज की गई।

डॉक्यूमेंट के अनुसार, राजस्थान में ड्रापआउट दर में सतत रूप से गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित ड्रापआउट दर नौ प्रतिशत और मुस्लिम बच्चों (18 प्रतिशत) में माध्यमिक स्कूली स्तर पर यह अभी भी अधिक है।

Also read: Rajasthan Elections: बागी तेवर से कांग्रेस की चुनौतियां बरकरार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के पिछले वर्ष के एक सर्वेक्षण में लड़कियों के बीच में स्कूल छोड़ने के कारणों में कहा गया था कि 33 प्रतिशत लड़कियों की पढ़ाई घरेलू कार्य करने के कारण छूट गई। इसके अनुसार, कई जगहों पर यह भी पाया गया कि बच्चों ने स्कूल छोड़ने के बाद परिजनों के साथ मजदूरी या लोगों के घरों में सफाई करने का काम शुरू कर दिया।

First Published - June 11, 2023 | 4:04 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट