facebookmetapixel
Zomato हर महीने 5,000 गिग वर्कर्स को नौकरी से निकालता है, 2 लाख लोग खुद छोड़ते हैं काम: गोयलनया इनकम टैक्स कानून कब से लागू होगा? CBDT ने बताई तारीख, अधिकारियों से तैयार रहने को कहाUS Venezuela Attack: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई: वैश्विक तेल आपूर्ति पर क्या असर?GST में बदलाव के बाद भी SUV की यूज्ड कार मार्केट पर दबदबा बरकरार, युवा खरीदारों की पहली पसंदक्या बीमा कंपनियां ग्राहकों को गलत पॉलिसी बेच रही हैं? IRDAI ने कहा: मिस-सेलिंग पर लगाम की जरूरतजिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?कहीं आपकी जेब में तो नहीं नकली नोट? RBI ने बताया पहचानने का आसान तरीकाकई बड़े शहरों में नहीं बिक रहे घर! मेट्रो सिटी में अनसोल्ड घरों का लगा अंबार, 2025 में आंकड़ा 5.7 लाख के पारMCap: शेयर बाजार की तेजी में टॉप 7 कंपनियों का मुनाफा, ₹1.23 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैपसाल की शुरुआत में FPIs ने निकाले 7,608 करोड़, विदेशी निवेशक रहे सतर्क

पेगासस जासूसी मामले में उच्चतम न्यायालय देगा अंतरिम आदेश

Last Updated- December 12, 2022 | 1:06 AM IST

केंद्र ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि कथित पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर वह विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि वह केवल यह जानना चाहती है कि क्या केंद्र ने नागरिकों की कथित जासूसी के लिए अवैध तरीके से पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया या नहीं? पत्रकारों एवं अन्य द्वारा निजता हनन की चिंताओं के बीच केंद्र्र के इस रुख को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे पर वह अंतरिम आदेश देगा। 
उसने दोहराया कि न्यायालय राष्टï्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी प्राप्त करने का इच्छुक नहीं है। विस्तृत हलफनामे के जरिये केंद्र का इस बारे में स्पष्ट रुख सामने आने का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली के पीठ ने सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह प्रत्युत्तर दलीलों में अदालत के सामने लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी दलील को दोहरा रहे हैं। पीठ ने कहा,’ कानून के तहत स्थापित एक प्रक्रिया है जो फोन सुनने की भी अनुमति देती है। आपके रुख को समझने के लिए हमें आपका हलफनामा चाहिए था। हम इससे आगे कुछ और नहीं कहना चाहते।’ पीठ ने कहा कि अगर सरकार किसी जासूसी सॉफ्वेयर का उपयोग करती है तो यह कानून के तहत स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। 

पीठ ने मेहता से कहा, ‘हम आदेश सुरक्षित रख रहे हैं। अंतरिम आदेश दिया जाएगा जिसमें दो से तीन दिन का वक्त लगेगा। यदि आप इस बारे में पुनर्विचार करते हैं तो मामले का उल्लेख हमारे समक्ष कर सकते हैं।’ सर्वोच्च न्यायालय ने मेहता से कहा कि यदि सरकार इस मामले में विस्तृत हलफनामा दायर करने के बारे में फिर से विचार करती है तो वह मामले का उल्लेख न्यायालय के समक्ष कर सकते हैं। पीठ ने मेहता से कहा, ‘हम केवल एक सीमित हलफनामे की उम्मीद कर रहे थे क्योंकि हमारे सामने याची हैं जिनका कहना है कि ए या बी एजेंसी द्वारा उनके निजता के अधिकार का हनन किया गया है। आपको यह बताना होगा कि ऐसा किया गया या नहीं? राष्ट्रीय सुरक्षा वर्तमान कार्यवाही का हिस्सा नहीं है।’ पीठ ने कहा, ‘ हम दोहराते हैं कि हम भी नहीं चाहते कि सुरक्षा व रक्षा संबंधी कोई मुद्दे हमारे समक्ष रखे जाएं।’
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से करीब घंटे भर चली सुनवाई के दौरान केंद्र ने पीठ से कहा कि वह विस्तृत हलफनामा दायर नहीं करना चाहता। सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि सरकार ने किसी विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है या नहीं, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित जानकारी को हलफनामे का हिस्सा बनाना राष्ट्रहित में नहीं होगा। मेहता ने कहा कि विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और यही वजह है कि उसने अपनी ओर से कहा कि आरोपों की जांच के लिए वह क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति का गठन करेगा। 

इस पर, पीठ ने मेहता से कहा कि यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि वह नहीं चाहते कि सरकार ऐसी कोई भी जानकारी का खुलासा करे जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ती हो। पीठ ने कहा, ‘आप (मेहता) बार-बार कह रहे हैं कि सरकार हलफनामा दायर नहीं करना चाहती। हम भी नहीं चाहते कि सुरक्षा संबंधी कोई मुद्दे हमारे समक्ष रखे जाएं। आपने कहा कि एक समिति बनाई जाएगी और रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। हमें तो पूरे मुद्दे को देखना है और अंतरिम आदेश देना है।’ उच्चतम न्यायालय ने सात सितंबर को देश में कुछ विशिष्ट लोगों की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिए कथित रूप से जासूसी कराए जाने के मामले की स्वतंत्र जांच के अनुरोध वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय प्रदान किया था। 

First Published - September 13, 2021 | 9:43 PM IST

संबंधित पोस्ट