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स्पूतनिक लाइट का परीक्षण जल्द

Last Updated- December 11, 2022 | 11:53 PM IST

भारत में जल्द ही बच्चों के लिए कोविड-19 से बचाव का एक और टीका तैयार हो सकता है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) बच्चों पर स्पूतनिक लाइट के परीक्षण के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रही है। डीआरएल बूस्टर खुराक के लिए स्पूतनिक के इस्तेमाल के लिए भी भारतीय दवा नियामक से बातचीत कर रही है। यह टीका दोनों खुराक लगने के छह महीने बाद तीसरी खुराक के रूप में लगाया जा सकता है। डीआरएल के मुख्य कार्याधिकारी (एपीआई ऐंड फार्मास्यूटिकल्स सर्विसेस) दीपक सपरा ने कहा कि वे रूस में तैयार टीके स्पूतनिक के विभिन्न विकल्पों के रूप में इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं।
सपरा ने कहा, ‘भारत में स्पूतनिक लाइट का परीक्षण चल रहा है और नवंबर में भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) को इसके आंकड़े सौंपे जा सकते हैं। इसके अलावा हम बूस्टर खुराक के रूप में स्पूतनिक लाइट के परीक्षण के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। हम डीसीजीआई से इसे लेकर बातचीत कर रहे हैं। बच्चों पर भी स्पूतनिक लाइट टीके का अलग से परीक्षण किया जाएगा। इतना ही नहीं, भारत में बने स्पूतनिक टीके के दूसरे देशों को निर्यात के लिए भी हम अपने साझेदारों से बातचीत कर रहे हैं।’
स्पूतनिक वी की पहली खुराक ‘स्पूतनिक लाइट’ के नाम से जाना जाती है। स्पूतनिक की पहली और दूसरी दोनों खुराकों में अलग-अलग वेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों पर स्पूतनिक लाइट के परीक्षण के लिए डीआरएल अलग-अलग उम्र के दो बच्चों का समूह तैयार करना चाहती है। पहले समूह में 2 से 12 और दूसरे समूह में 12 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल होंगे। सपरा ने कहा, ‘हम इस परीक्षण के लिए जरूरी तैयारी कर रहे हैं। भारतीय संयंत्र बच्चों के लिए स्पूतनिक लाइट का उत्पादन एवं इसकी आपूर्ति कर सकते हैं।’ जहां तक बूस्टर डोज की बात है तो कंपनी ने कहा कि जब कोई कोविड-19 से बचाव की दोनों खुराक, चाहे वे किसी भी कंपनी की क्यों न हो, ले लेगा तो हम उस पर बूस्टर डोज के रूप में स्पूतनिक का परीक्षण करेंगे।
भारत को अब तक स्पूतनिक वी की 11 लाख खुराक दी गई है। हालांकि डीआरएल ने माना कि निजी बाजारों में इस टीके की मांग बहुत अधिक  नहीं है। हाल के महीनों में निजी केंद्रों पर भुगतान कर टीके लगाने काफी कम लोग आ रहे हैं जिससे वहां टीकों की मांग कम हो गई है। डीआरएल केवल निजी संस्थानों को स्पूतनिक की बिक्री करती है। कंपनी स्पूतनिक लाइट सरकार को बेचने के लिए बातचीत कर रही है। टीके के दाम में कमी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सपरा ने कहा कि इस विषय पर बातचीत चल रही है मगर अंतिम निर्णय भारत सरकार और भारत और रूस में डीआरएल के साझेदारों पर निर्भर करेगा।
निजी बाजार में स्पूतनिक वी टीका प्रति खुराक 995 रुपये मूल्य पर उतारा गया था। मौजूदा हालात को देखते हुए डीआरएल स्पूतनिक टीके की मांग को बढ़ावा देने के लिए इसके इस्तेमाल के विभिन्न विकल्प आजमा रही है। इस टीके का निर्यात भी एक विकल्प है।
सपरा ने कहा, ‘लैटिन अमेरिका एवं केंद्रीय अमेरिकी देशों के अलावा एशिया-प्रशांत, अफ्रीकी देशों को भी टीके की आपूर्ति करने पर चर्चा चल रही है।’ हालांकि यह योजना इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय संयंत्रों से स्पूतनिक वी टीके की किस हद तक आपूर्ति हो पाती है। डीआरएल को शुरू से ही रूस से इस टीके की आपूर्ति सुनिश्चित करने में समस्याएं पेश आ रही हैं।
सितंबर में डीआरएल के पास स्पूतनिक लाइट की 26 खुराक मौजूद थी। कुछ कारणवश कंपनी को रूस से स्पूतनिक लाइट की 31 लाख खुराक मिली और केवल 45 लाख दूसरी खुराक मिली। इससे भारत में बड़े पैमाने पर इस टीके को बाजार में उतारना मुमकिन नहीं हो पाया। डीआरएल भारत में स्पूतनिक टीके की अकेली वितरक है।

कोविड दवाएं बढ़ाने पर जोर
डीआरएल कोविड के इलाज के लिए दवाओं के विभिन्न रूप तैयार करने और इनके लिए बाजार का आकार बढ़ाने पर काम कर रही है। उदाहरण के लिए कंपनी गिलियड की दवा रेमेडेसिविर का टीके के जरिये दिया जाने वाला संस्करण (1 मिलीलीटर) तैयार कर रही है। रेमडेसिविर दवा कोविड के हल्के से गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को दी जाती है। कंपनी विषाणु रोधी दवा फैविपिराविर का बाजार का विस्तार भारत से बाहर भी करना चाहती है। डीआरएल एमएसडी की दवा मोलनूपिराविर के परीक्षण के अंतरिम आंकड़े दवा नियामक को सौंप चुकी है।

First Published - October 29, 2021 | 10:52 PM IST

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