पैरासिटामोल दर्द और बुखार की सामान्य दवा है जिसे किसी भी दवा दुकान से आसानी से खरीदा जा सकता है लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान इसकी बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट आई है। आमतौर पर मॉनसून के दौरान पैरासिटामोल की बिक्री अधिक होती थी क्योंकि उस दौरान सर्दी-बुखार का प्रकोप बढ़ जाता है। लेकिन इस साल कोरोना वैश्विक महामारी के मद्देनजर तमाम तरह की पाबंदियों और सर्दी-जुकाम की दवाओं की बिक्री पर की जा रही निगरानी के कारण पैरासिटामोल की खुदरा बिक्री को झटका लगा है।
लोकप्रिय ब्रांड की पैरासिटामोल दवा की बिक्री में कहींं अधिक गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, अगस्त में एक श्रेणी के तौर पर पैरासिटामोल की बिक्री में 20.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई। कालपोल की बिक्री 31.5 फीसदी घट गई जबकि क्रॉसिन की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई।
देश भर के करीब 85 लाख दवा विक्रेताओं के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स ऐंड ड्रगिस्ट्स के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि पैरासिटामोल की अधिकांश बिक्री बिना पर्ची (ओटीसी) के होती है। जिन ब्रांडों का रीकॉल वैल्यू अधिक होती है वे अधिक ओटीसी की बिक्री करते हैं और इस प्रकार बिक्री में भारी गिरावट भी आई है। सिंघल ने स्पष्ट किया कि सरकार के निर्देशों के कारण खुदरा विक्रेता बिना पर्ची के सर्दी और बुखार की दवाओं की बिक्री नहीं करते हैं। उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों की पहचान करने के लिए यह जरूरी है कि इस प्रकार की दवाओं की बिक्री पर नजर रखी जाए। हम बिना वैध पर्ची के सर्दी और बुखार की दवाओं की बिक्री नहीं करते हैं।’ अप्रैल से मई के दौरान कई राज्य सरकारों ने पैरासिटामोल, आम एनाल्जेसिक, एंटी-एलर्जी दवाओं के साथ-साथ एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री पर काफी सतर्कता बरती है। इसके अलावा श्वसन संबंधी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स (जैसे एजिथ्रोमाइसिन) की बिक्री में भी सख्ती बरती गई है। तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेख्श, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में सर्दी एवं खांसी की दवाओं की खरीदारी करने वाले रोगियों का रिकॉर्ड रखने के लिए सलाह जारी की गई थी।