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फ्लाइट में पावर बैंक पर सख्ती: DGCA के आदेश के बाद एयरलाइंस ने बदला नियम, यात्रियों के लिए अलर्ट

यह कदम नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की 11 नवंबर की एक सर्कुलर के बाद उठाया गया है

Last Updated- January 04, 2026 | 8:43 PM IST
Aeroplane
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

एयरलाइंस अब यात्रियों से कह रही हैं कि फ्लाइट में पावर बैंक का इस्तेमाल न करें। अगर गेट पर हैंड बैगेज चेक-इन के लिए लिया जाता है, तो ऐसे डिवाइस यात्रियों के पास ही रहें। यह कदम नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की 11 नवंबर की एक सर्कुलर के बाद उठाया गया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लिथियम बैटरी का इस्तेमाल बढ़ने से विमान में सुरक्षा जोखिम ज्यादा हो गया है। नियामक के मुताबिक, “पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और इसी तरह के डिवाइस” में मौजूद लिथियम बैटरी आग लगने का कारण बन सकती हैं और फ्लाइट में आग भड़का सकती हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड के सवालों का एयरलाइंस ने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन एक सीनियर एयरलाइन अधिकारी ने बताया कि केबिन क्रू अब फ्लाइट में अनाउंसमेंट कर रहे हैं। वे यात्रियों से कह रहे हैं कि पावर बैंक इस्तेमाल न करें, विमान के यूएसबी पोर्ट से चार्ज न करें और पावर बैंक को अपने पास रखें, ओवरहेड बिन में न डालें।

सर्कुलर में क्या कहा गया?

DGCA की सर्कुलर में बताया गया है कि ओवरहेड बिन या केबिन बैगेज में रखी लिथियम बैटरी तक पहुंचना या निगरानी करना मुश्किल होता है। ऐसे में धुआं या आग का पता लगने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा को ज्यादा खतरा होता है।

सर्कुलर के अनुसार, “लिथियम बैटरी की आग बहुत तेज होती है और डिवाइस फट सकता है।” आग लगने की वजह ज्यादा गर्म होना, ओवरचार्जिंग, कुचलना, अंदरूनी शॉर्ट सर्किट, खराब क्वालिटी या गलत हैंडलिंग हो सकती है।

नियामक ने कहा कि हाल के समय में दुनिया भर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विमान में लिथियम बैटरी को आग लगने की शक की वजह माना गया। DGCA ने एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को निर्देश दिया कि लिथियम बैटरी और रिचार्जेबल डिवाइस (लैपटॉप, मोबाइल, टैबलेट सहित) से जुड़े सुरक्षा जोखिम की फिर से समीक्षा करें और प्रक्रिया को मजबूत बनाएं।

एयरलाइंस के लिए निर्देश

DGCA ने एयरलाइंस से कहा है कि लिथियम बैटरी से जुड़े जोखिम की फिर से जांच करें, केबिन में आग लगने की संभावना कम करने के उपाय अपनाएं और आग का जल्दी पता लगाने व बुझाने की व्यवस्था मजबूत करें।

एयरलाइंस को इमरजेंसी उपकरणों की समीक्षा करने को कहा गया है, जिसमें केबिन क्रू के लिए पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट भी शामिल है। साथ ही ऑपरेटिंग प्रक्रिया को इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन, विमान निर्माताओं और DGCA के दिशानिर्देशों के अनुसार ढालें।

क्रू ट्रेनिंग पर खास जोर दिया गया है। एयरलाइंस को सुरक्षा, इमरजेंसी प्रक्रिया और डेंजरस गुड्स ट्रेनिंग को और मजबूत करना होगा। क्रू को लिथियम बैटरी के थर्मल रनअवे के शुरुआती संकेत (जैसे ज्यादा गर्मी, धुआं या आग) पहचानना, धुएं से होने वाले सेकंडरी खतरे समझना और आग बुझाने के उपकरण व फायर कंटेनमेंट किट को तैयार रखना सिखाया जाए।

Also Read: इंडिगो संकट: DGCA ने 4 उड़ान निरीक्षकों को किया निलंबित, एयरलाइन ने इल्सन को स्वतंत्र समीक्षा के लिए नियुक्त किया

यात्रियों के लिए संदेश

DGCA ने एयरलाइंस से कहा है कि यात्रियों तक जानकारी मजबूत तरीके से पहुंचाएं – अनाउंसमेंट, साइनेज और डिजिटल मैसेज के जरिए। इनमें बताया जाए कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड बैगेज में रखें, फ्लाइट में इस्तेमाल या चार्जिंग न करें और अगर कोई डिवाइस से गर्मी, धुआं या अजीब गंध आए तो तुरंत केबिन क्रू को बताएं।

साथ ही केबिन क्रू को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्री पावर बैंक और स्पेयर बैटरी को ओवरहेड बिन में न रखें।

एयरपोर्ट ऑपरेटरों की जिम्मेदारी

एयरपोर्ट ऑपरेटरों को टर्मिनल, चेक-इन काउंटर, लाउंज, बोर्डिंग गेट और सिक्योरिटी चेकपॉइंट पर साफ-साफ नोटिस और वीडियो दिखाने को कहा गया है, ताकि लिथियम बैटरी से आग के खतरे की जानकारी फैले। यात्रियों को बोर्डिंग से पहले ऐसे डिवाइस चार्ज न करने की चेतावनी दी जाए। सभी पक्षों के साथ मिलकर सुरक्षित तरीके से ले जाने की जागरूकता बढ़ाई जाए।

DGCA ने एयरलाइंस को लिथियम बैटरी से जुड़े हर सुरक्षा मामले और घटना की तुरंत रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया है। इससे पता चलता है कि पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से होने वाले आग के जोखिम को कम करने पर नियामक का खास ध्यान है।

First Published - January 4, 2026 | 8:19 PM IST

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