दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र को ब्लैक फंगस के उपचार में उपयोगी लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी के वितरण के लिए नीति बनाने एवं मरीजों की प्राथमिकता बताने का निर्देश दिया ताकि सभी नहीं तो कुछ जिंदगियां बचाई जा सकें। उच्च न्यायालय ने कहा कि दवा देते समय यह ध्यान रखा जाए कि जिनके जीवित रहने की बेहतर संभावना है, उन्हें एवं कम आयु वर्ग के लोगों को उन वृद्धों की तुलना में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिन्होंने अपनी जिंदगी जी ली है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह के पीठ ने कहा कि केंद्र अपनी नीति में यह अपवाद कर सकता है कि जो शीर्ष पदों पर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं और जिसकी सुरक्षा उनकी अहम भूमिकाओं के चलते जरूरी है, उन्हें यह दवा दी जाए। उसने कहा कि इस दवा की दिल्ली समेत पूरे देश में पिछले दो सप्ताह से कमी है।
अदालत ने कहा कि यह सही वक्त है कि विभिन्न रोगों के मरीजों के उपचार के लिए दिशानिर्देश तय करने वाली भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ब्लैक फंगस के उपचार के सिलसिले में लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी, एम्फोटेरिसिन-बी, और पोसाकोनाजोन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे।
टीके की 100 खुराक, 400 की कतार
पढ़ाई के लिए विदेश जाने के इच्छुक कई छात्रों को मुंबई के सरकारी राजावाड़ी अस्पताल में लगातार दूसरे दिन कोरोनावायरस रोधी टीके की खुराक नहीं मिलने से बिना टीका लिए ही लौटना पड़ा। वृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पिछले सप्ताह ऐसे छात्रों के लिए सोमवार से बुधवार तक शहर के कस्तूरबा अस्पताल, राजावाड़ी अस्पताल और कूपर अस्पताल से बिना पंजीकरण के वॉक-इन टीकाकरण की घोषणा की थी। सूत्रों ने बताया कि बीएमसी ने मंगलवार को इस श्रेणी के तहत 500 टीके की खुराक आवंटित की थी। कस्तूरबा और कूपर अस्पतालों को 200-200 खुराक और राजावाड़ी अस्पताल को 100 खुराक मिली थी। लेकिन राजावाड़ी अस्पताल में सुबह बड़ी संख्या में छात्र आ गए।
छात्र संदेश अवहद ने बीएमसी और महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे को टैग कर ट्वीट किया, ‘हमलोग राजावाड़ी, घाटकोपर में टीकाकरण के लिए कतार में लगे हैं। टीकों की 100 खुराक आवंटित की गई है और कतार में 400 से अधिक लोग हैं। कृपया यह सुनिश्चित करें कि हम सभी को टीका मिले।’ भाषा