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टीबी के मामलों में 19 फीसदी की उछाल

Last Updated- December 11, 2022 | 8:35 PM IST

भारत में 2021 में तपेदिक (टीबी) के मामलों में एक साल पहले की तुलना में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी इंडिया टीबी रिपोर्ट 2022 से इसका खुलासा हुआ है। 2021 के दौरान टीबी के कुल मरीजों की संख्या (नए और पुराने) करीब 19,33,381 थी जो 2020 में 16,28,161 थी। वर्ष 2019 और 2020 के बीच टीबी के सभी स्वरूपों की वजह से मरने वालों की दर में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एचआईवी को छोड़कर टीबी के सभी स्वरूपों में मरने वालों की अनुमानित संख्या 2020 में 4.93 लाख थी जो 2019 के अनुमान से 13 प्रतिशत अधिक है।
वर्ष 2019 में भारत में टीबी के मामले में 11 प्रतिशत की उछाल आई थी और कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 24.04 लाख हो गई। वहीं 2020 में महामारी के दो महीने (मार्च और अप्रैल) के बाद टीबी की अधिसूचना में जनवरी और फरवरी की तुलना में 38 प्रतिशत की कमी आई। साल 2020 के अंत में भी टीबी के मामले में तेजी आनी शुरू हुई और कुल 18 लाख मामले दर्ज किए गए और अनुमान की तुलना में अप्रैल के अंत तक इसमें 11 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। इस बीच कोरोनावायरस महामारी के फैलने की वजह से भी टीबी के मामले दर्ज होने की प्रक्रिया पर असर पड़ा। टीबी इंडिया रिपोर्ट 2022 में कहा गया, ‘कई दशकों तक सफलता पाने के बाद टीबी से बचाव की कवायद को झटका लगा।’
तपेदिक उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी 2017-25) के मुताबिक भारत ने 2025 तक तपेदिक को खत्म करने का लक्ष्य रखा था और करीब 18 राज्यों ने औपचारिक तौर पर राज्य विशेष रणनीतिक योजना बनाकर 2025 तक टीबी को खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया, ‘इस योजना के चलते टीबी के मामलों में कमी आनी शुरू हो गई और देश में कोविड की दो लहरों वाले महीनों के दौरान भी इसे देखा गया।’ इसके अलावा छाती में दिक्कत वाले लक्षणों में भी बदलाव देखा गया।
वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2021 के मुताबिक भारत में 2020 में टीबी के सभी स्वरूपों के मामले एक लाख लोगों की आबादी पर करीब 188 थे। वहीं भारत में बच्चों में टीबी की समस्या बनी हुई है और यह वैश्विक स्तर पर करीब 31 फीसदी का योगदान दे रहा है।
पिछले दशक में सालाना राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत इलाज कराने वाले कुल मरीजों में मरीजों की संख्या 6-7 फीसदी तक रहती है और अनुमानित मामले के मुकाबले इसमें 4-5 फीसदी का अंतर दिखता है। टीबी के साथ-साथ अन्य बीमारियां जैसे कुपोषण, मधुमेह, एचआईवी, तंबाकू का सेवा और शराब आदि के इस्तेमाल से भी टीबी के गंभीर होने के मामलों पर असर दिखता है। अप्रैल 2018 से लेकर फरवरी 2022 तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के तहत निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) में करीब 57.33 लाख टीबी मरीजों को करीब 1,488 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
वर्ष 2021 में करीब 21,35,830 मरीजों की जांच हुई जबकि करीब 20,30,509 (95 फीसदी) मरीजों का इलाज हुआ। जिन मरीजों का इलाज शुरू हुआ उनमें करीब 61 फीसदी मरीज पुरुष और करीब 39 फीसदी मरीज महिला थीं। कुल मामले में से करीब 6 फीसदी मरीज बच्चों के उम्र वर्ग में थे। 2020 के कुल मरीजों में से करीब 83 फीसदी का सफलतापूर्वक इलाज हुआ जबकि करीब 4 फीसदी मरीजों की मौत इलाज के दौरान हो गई।
बुधवार को जारी राष्ट्रीय टीबी प्रीवैलेंस सर्वे के नतीजे के मुताबिक टीबी के लक्षण वाली करीब 64 फीसदी आबादी ने स्वास्थ्य सेवाएं नहीं ली थीं। इसकी वजह यह थी कि करीब 68 फीसदी मरीज लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे थे जबकि करीब 18 फीसदी टीबी के लक्षण की पहचान नहीं कर सके। वहीं करीब 12 फीसदी मरीजों ने अपना खुद ही इलाज किया जबकि 2 प्रतिशत टीबी के मरीज इलाज कराने का खर्च नहीं उठा सकते थे।
यह सर्वे 2019 और 2021 के बीच हुआ जिसमें 15 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में श्वसन तंत्र से जुड़े टीबी के मामले की पुष्टि हुई और यह तादाद एक लाख की आबादी पर 316 थी, वहीं केरल में प्रति एक लाख की आबादी पर यह तादाद 151 जबकि दिल्ली में प्रति एक लाख की आबादी में यह संख्या 534 थी। भारत में सभी उम्र वर्ग में टीबी के सभी स्वरूपों की दर 2021 में एक लाख की आबादी पर 312 थी और दिल्ली में टीबी के सभी स्वरूपों वाले मामले की दर सबसे ज्यादा प्रति एक लाख पर 747 थी और गुजरात में यह सबसे कम यानी एक लाख की आबादी पर यह संख्या 137 थी।
देश में कोविड-19 के 1,938 नए मामले, 67 और लोगों की मौत
भारत में एक दिन में कोविड-19 के 1,938 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोनावायरस से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,30,14,687 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 22,427 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार को सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में 67 और लोगों की मौत के बाद, संक्रमण की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 5,16,672 हो गई। देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 22,427 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.05 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 660 की कमी दर्ज की गई। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.75 प्रतिशत है। अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 0.29 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.35 प्रतिशत दर्ज की गई। देश में अभी तक 78.49 करोड़ से अधिक नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है, जिनमें से 6,61,954 नमूनों की जांच पिछले 24 घंटे में की गई। देश में अभी तक कुल 4,24,75,588 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और कोविड-19 से मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है।     भाषा

First Published - March 24, 2022 | 11:21 PM IST

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