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जलवायु सम्मेलन में भारत का रुख अगले सप्ताह होगा तय

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Last Updated- December 12, 2022 | 12:02 AM IST

स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होने वाले 26वें वैश्विक जलवायु सम्मेलन में भारत वर्ष 2030 तक करीब 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के इर्दगिर्द अपनी योजना तय करने के साथ ही विकसित देशों से जलवायु फंड बनाने की मांग कर सकता है। इस आशय के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए अगले हफ्ते रखा जाएगा।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि भारत सरकार विकसित देशों के हर साल 100 अरब डॉलर की जलवायु फंडिंग मुहैया कराने की मांग पर अडिग है। भारत ग्लोबल नॉर्थ से ऐसी व्यवस्था बनाने की भी मांग करेगा जिससे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं से होने वाले नुकसान एवं क्षति की भरपाई की जा सके।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम विकसित अर्थव्यवस्थाओं से जलवायु संबंधी प्रभावों की जद में आने वाले देशों को मुआवजा देने की मांग रखने जा रहे हैं। इसके अलावा ऐसे हादसों को रोकने एवं उनके बेहतर प्रबंधन पर होने वाले खर्च की भरपाई की भी मांग की जाएगी। इस मुद्दे पर हमें समान सोच वाले 24 विकासशील देशों का समर्थन भी मिलेगा।’

ग्लासगो सम्मेलन में शिरकत करने वाले भारत का 15 सदस्यीय दल शिरकत करेगा, जिसकी अगुआई मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव ऋचा शर्मा करेंगी। मुख्य वार्ताकार के तौर पर शामिल ऋचा शर्मा के अलावा ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, वित्त, कृषि एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों के प्रतिनिधि में इस दल में शामिल होंगे।

अधिकारियों के मुताबिक, भारत प्रतिकूल जलवायु घटनाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई फंड बनने की स्थिति में खुद भी अंशदान करने को तैयार है। एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रदूषक को भुगतान करना होगा वाला सिद्धांत यहां लागू होना चाहिए। यह ऐतिहासिक प्रदूषकों पर लागू हो। लेकिन अगर हमसे भी योगदान करने को कहा जाएगा तो हम करेंगे। वैसे भी कार्बन उत्सर्जन की हमारी सीमा कम है लिहाजा हम ऐसा कर सकते हैं।’

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 1.96 टन प्रति वर्ष है जबकि चीन में यह 8.4 टन, अमेरिका में 18.6 टन और यूरोपीय संघ 7.16 टन है।

विकसित देश भारत पर 2015 के पेरिस समझौते में घोषित अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को संशोधित करने का दबाव डालते रहे हैं। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि भारत के लिए वर्ष 2023 तक ऐसा करना अनिवार्य नहीं है। इसकी भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि भारत कोयला एवं जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल बंद करने संबंधी समय-सीमा में कोई बदलाव करेगा।

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First Published - October 23, 2021 | 12:12 AM IST

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