इटली की एनर्जी कंपनी Eni ने कांगो (रिपब्लिक ऑफ कांगो) के तट से एक नई फ्लोटिंग LNG यूनिट से यूरोप को गैस सप्लाई शुरू कर दी है। यह जहाज Nguya नाम का है, जो समुद्र में ही नेचुरल गैस को लिक्विड में बदलकर टैंकरों से भेजता है। इस खबर से पता चलता है कि फ्लोटिंग LNG (FLNG) तकनीक अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है, खासकर उन जगहों पर जहां जमीन पर प्लांट बनाना मुश्किल या महंगा है।
Nguya एक बड़ा फ्लोटिंग इंडस्ट्रियल प्लांट है, जो समुद्र में लंगर डाले रहता है। यह जहाज इतना लंबा है कि अमेरिका के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर से भी बड़ा है जो करीब 376 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा है। इसमें ढेर सारी मशीनरी लगी है, जैसे पाइप, कूलिंग सिस्टम, टरबाइन और स्टोरेज टैंक आदि।
FT की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका काम का तरीका सिंपल लेकिन एडवांस्ड है। ऑफशोर फील्ड्स से निकलने वाली नेचुरल गैस को पहले प्री-ट्रीटमेंट यूनिट में ऑयल और दूसरे लिक्विड से अलग किया जाता है। इसके लिए पुराने फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म Scarabeo 5 को कन्वर्ट करके इस्तेमाल किया गया है। फिर गैस को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके लिक्विफाई कर दिया जाता है। इससे गैस का वॉल्यूम बहुत कम हो जाता है, जिससे दूर-दूर तक टैंकरों से भेजना आसान और सस्ता पड़ता है।
यह जहाज चीन की कंपनी Wison ने बनाया है और तीन साल से भी कम समय में तैयार हो गया। जापान में डिजाइन किए गए स्टोरेज टैंक अलग से बनाकर हाल में फिट किए गए, जिससे काम तेज हुआ। Nguya की कैपेसिटी 2.4 मिलियन टन प्रति साल है। इससे पहले प्रोजेक्ट में Tango FLNG (0.6 मिलियन टन कैपेसिटी) काम कर रहा था, और अब दोनों मिलाकर कुल 3 मिलियन टन प्रति साल हो गया है। गैस स्पेन और इटली जैसे यूरोपीय देशों को जा रही है।
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पहले FLNG प्रोजेक्ट्स में बहुत दिक्कत आई थी। जैसे ऑस्ट्रेलिया का Prelude प्रोजेक्ट, जो Shell चला रहा था, उसमें करीब 12 बिलियन डॉलर खर्च हो गए और कमर्शियल सफलता पर सवाल उठे। लागत ज्यादा होने और ऑपरेशनल प्रॉब्लम्स की वजह से लोग हिचकिचाते थे।
अब हालात बदल गए हैं। Eni के मुताबिक, FLNG बनाने की लागत पिछले कुछ सालों में 40 फीसदी तक कम हो गई है। अब प्रति मिलियन टन सालाना कैपेसिटी के लिए 1 बिलियन डॉलर से कम खर्च आता है। Nguya जैसे जहाज के लिए कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 2.5 बिलियन डॉलर से कम रह सकती है, हालांकि कुल प्रोजेक्ट में दूसरे खर्चे भी जुड़ते हैं।
शिपयार्ड अब स्टैंडर्ड डिजाइन इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे समय और कॉस्ट दोनों कंट्रोल में रहते हैं। Rystad Energy की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ग्लोबल FLNG कैपेसिटी 14.1 मिलियन टन प्रति साल थी, जो 2030 तक 42 मिलियन टन हो जाएगी और 2035 तक 55 मिलियन टन पहुंच जाएगी। यानी तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी।
अफ्रीका जैसे इलाकों में ऑफशोर गैस रिजर्व बहुत हैं, लेकिन जमीन पर प्लांट बनाना जोखिम भरा है। सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स, रेगुलेटरी डिले और पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी की वजह से प्रोजेक्ट सालों तक अटक जाते हैं। जैसे मोजांबिक में TotalEnergies का ऑनशोर LNG प्रोजेक्ट 2021 में आतंकी हमले के बाद पांच साल तक रुका रहा।
FLNG में जहाज समुद्र में रहता है, तो जमीन से दूर रहकर काम करता है। कोई बड़े लैंड-बेस्ड फैसिलिटी की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लॉजिस्टिक्स, रेगुलेशन और सिक्योरिटी रिस्क कम हो जाते हैं। कांगो में Nguya shallow waters में अंकर है और इंडिपेंडेंट तरीके से चल रहा है।
FLNG अब कई जगहों पर चल रहा है या प्लान में है। जैसे मॉरिटानिया और सेनेगल के बीच Gimi जहाज BP के लिए काम कर रहा है। यह पुराने टैंकर से कन्वर्ट किया गया है। Golar जैसी कंपनियां पुराने शिप्स को FLNG में बदलकर लीज पर देती हैं, जिससे प्रोड्यूसर्स को बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं करना पड़ता।
अफ्रीका इस तकनीक का बड़ा फोकस है, क्योंकि यहां ऑफशोर रिजर्व ज्यादा हैं और ऑनशोर इंफ्रा कमजोर है। लैटिन अमेरिका में अर्जेंटीना, गुयाना और सूरीनाम में भी इंटरेस्ट बढ़ रहा है। Eni अर्जेंटीना के Vaca Muerta ऑफशोर में बड़ा FLNG प्रोजेक्ट प्लान कर रहा है, जहां कई जहाजों से 18 मिलियन टन सालाना तक प्रोडक्शन हो सकता है, जितना बड़े लैंड-बेस्ड टर्मिनल्स से होता है।
यह तकनीक अच्छी है, लेकिन कुछ कमियां भी हैं। जहाज की साइज लिमिटेड होने से ज्यादा इक्विपमेंट नहीं फिट हो पाता। इसलिए कैपेसिटी ऑनशोर प्लांट्स जितनी बड़ी नहीं होती। ज्यादातर FLNG गैस टरबाइन से चलते हैं, जबकि कुछ मॉडर्न ऑनशोर प्लांट्स इलेक्ट्रिक ड्राइव इस्तेमाल करते हैं – इससे एफिशिएंसी और एमिशन पर असर पड़ता है, खासकर जब दुनिया कार्बन कंट्रोल की बात कर रही है।
हर फील्ड की गैस की क्वालिटी अलग होती है, जिससे प्रोसेसिंग और डिजाइन में चेंजेस करने पड़ते हैं।
फ्लोटिंग LNG ने गैस को नए तरीके से दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खोला है। यह ऑफशोर रिजर्व को जल्दी डेवलप करने, कम समय में शुरू करने और रिजर्व खत्म होने पर जहाज को कहीं और शिफ्ट करने की सुविधा देता है। Eni जैसे प्लेयर्स इसे तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं, और ग्लोबल गैस मार्केट में इसका रोल बढ़ता जा रहा है।