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‘AI के दौर में नौकरियां खत्म नहीं बल्कि बदलेंगी’, नंदन नीलेकणि बोले: पुराने तरीके से नहीं चलेगा बिजनेस

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विश्लेषकों से बात करते हुए नीलेकणि ने तर्क दिया कि एआई के दौर में ‘अवसर की कमी नहीं’ है। इसके बजाय, कंपनियों को जिस चुनौती का सामना करना पड़ता है, वह है क्रियान्वयन से जुड़ा अ

Last Updated- February 17, 2026 | 10:36 PM IST
artificial intelligence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नॉलजी उद्योग के लिए अब तक के सबसे बड़े अवसरों में से एक है। लेकिन असली चुनौती आविष्कार नहीं, बल्कि इसे लागू करने से जुड़ी है। इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कंपनी के इन्वेस्टर एआई दिवस पर यह बात कही।

विश्लेषकों से बात करते हुए नीलेकणि ने तर्क दिया कि एआई के दौर में ‘अवसर की कमी नहीं’ है। इसके बजाय, कंपनियों को जिस चुनौती का सामना करना पड़ता है, वह है क्रियान्वयन से जुड़ा अंतर। एआई मॉडलों में तेजी से हो रही प्रगति और कंपनियों की उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता के बीच बढ़ती दूरी।

अपने 20 मिनट के भाषण में नीलेकणि ने कहा, ‘मेरा मानना है कि मौके की कोई कमी नहीं है। अगर कुछ है, तो मौका पहले से कहीं ज्यादा बड़ा है। इसलिए इससे ध्यान भटकाने की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने यह भी बताया कि टेक्नॉलजी उसे तैनात करने से बहुत आगे है।  

नीलेकणि  ने कहा कि असल में, यह संगठनत्मक बदलाव, व्यवसाय में बदलाव, लोगों को ट्रेनिंग और रीट्रेनिंग देने, नॉन-डिटरमिनिस्टिक तरीकों के बारे में सोचने, डेटा को बदलने के बारे में है। इसलिए यह अब अलग-थलग नहीं है।  

हार्वर्ड के प्रोफेसर क्लेटन क्रिस्टेंसन की ‘टेक्नॉलजी ओवरशूट’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए, नीलेकणि ने कहा कि एआई क्षमता असल उद्यम जरूरतों से आगे निकल सकती है, जिससे उन लोगों के लिए जोखिम और मौके, दोनों पैदा हो सकते हैं जो इसे अच्छे से कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘आप पुराने तरीके से बिजनेस नहीं चला सकते।’ उद्यमों द्वारा लंबे समय से टाले जा रहे आधुनिकीकरण को अब स्थगित नहीं किया जा सकता है। कई बड़ी फर्में अभी भी दशकों में निर्मित पुरानी प्रणालियों को बनाए रखने के लिए आईटी बजट का 60-80 प्रतिशत खर्च करती हैं। ये सिस्टम, जो अक्सर अलग-थलग होते हैं और दस्तावेजबद्ध नहीं होते, साइबर खतरों की जद में आ जाते हैं।

एआई का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए कंपनियों को वह करना होगा जिसे नीलेकणि ने ‘रूट-ऐंड-ब्रांच सर्जरी’ बताया है – टेक पर जमा ऋण को साफ करना, डेटा साइलो को तोड़ना और एआई-नेटिव संचालन के लिए सिस्टम को फिर से बनाना।  

नीलेकणि ने जोर देकर कहा कि एआई प्रतिभा की जरूरतों को खत्म नहीं करेगा, लेकिन यह भूमिकाओं को फिर से परिभाषित करेगा। पारंपरिक कोडिंग और टेस्टिंग नौकरियां एआई इंजीनियरिंग, ऑर्केस्ट्रेशन, फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट इंजीनियरिंग, फोरेंसिक एनालिसिस और डेटा-सेंट्रिक भूमिकाओं में विकसित होंगी।

इन्फोसिस ने पहली बार एआई से जुड़े अपने राजस्व पर भी विवरण साझा किया। इन्फोसिस के सीईओ और एमडी सलिल पारेख ने अपने प्रस्तुतीकरण में कहा कि कंपनी अपने 200 बड़े ग्राहकों में से 90 प्रतिशत को एआई सेवाएं प्रदान करती है। पारेख ने पहली बार खुलासा किया कि कंपनी का एआई से संबंधित राजस्व वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में उसके राजस्व का 5.5 प्रतिशत है।

पारेख ने कहा, ‘यह तेजी से बढ़ रहा है। यह बेहद गतिशील है।’

आज इन्फोसिस ने एन्थ्रॉपिक के साथ साझेदारी की भी घोषणा की। दोनों फर्में दूरसंचार, फाइनैंशियल सर्विसेज, विनिर्माण और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में कंपनियों को उन्नत एंटरप्राइज एआई समाधान विकसित और वितरित करेंगी।

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First Published - February 17, 2026 | 10:36 PM IST

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