जीवन बीमा उद्योग के प्रमुख अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले सप्ताह भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के अध्यक्ष अजय सेठ से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, पिछले हफ्ते हुई इस बैठक में ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव पेश किए गए। इनमें वितरकों को दिए जाने वाले कमीशन ढांचे में बदलाव और बीमा कंपनियों की परिचालन लागत कम करने के उपाय शामिल हैं ताकि पॉलिसीधारकों को अधिक लाभ मिल सके।
उद्योग ने यह सिफारिश कि है कि पॉलिसी बिक्री के पहले वर्ष में वितरकों को दिए जाने वाले अग्रिम कमीशन का एक हिस्सा तुरंत देने के बजाय तीन से पांच वर्षों में किस्तों में दिया जाए। इससे शुरुआती अधिग्रहण लागत कम होगी और संभव है कि ग्राहकों पर प्रीमियम का बोझ भी घटे।
इसके अलावा, उद्योग स्थायी खर्चों को नियंत्रित करने और परिचालन खर्च व बिक्री के अनुपात को संतुलित स्तर पर लाने के उपायों पर भी विचार कर रहा है। विभिन्न कदमों के माध्यम से ग्राहकों के लिए बीमा उत्पादों को अधिक आकर्षक और किफायती बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब जीवन बीमा उद्योग की ऊंची अधिग्रहण लागत को लेकर सरकार, आईआरडीएआई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और आर्थिक समीक्षा सहित कई स्तरों पर कड़ी समीक्षा की जा रही है। माना जा रहा है कि अधिक लागत के कारण बीमा उत्पाद कई लोगों के लिए महंगे साबित होने के साथ ही कम सुलभ हैं।
स्थिति का आकलन करने के लिए जीवन बीमा कंपनियों ने जीवन बीमा परिषद के तहत एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने इस क्षेत्र से जुड़े कमीशन संरचना की समीक्षा की और सुझाव दिया कि वितरकों को दिए जाने वाले कमीशन पर सीमा तय की जाए या उसे कुछ समय के लिए टालकर दिया जाए। इसका उद्देश्य अधिग्रहण लागत को कम करना है।