भारत का पेमेंट इकोसिस्टम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणाली के साथ मजबूत समेकन के दौर में बढ़ रहा है, क्योंकि कंपनियां एजेंटिक इंटरफेस पर जोर दे रही हैं और ट्रांजेक्शन के लिए वैश्विक एआई सॉफ्टवेयर फर्मों के साथ साझेदारी कर रही हैं। फिनटेक कंपनियां ऐसे एजेंटिक इंटरफेस लगा रही हैं जो ट्रांजेक्शन पूरा करने को व्यवसायी के एजेंटों के साथ बातचीत करते हैं। नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने फिमी (फाइनैंस मॉडल फॉर इंडिया) पेश किया है, जो भारतीय भुगतान तंत्र के लिए एक डोमेन-केंद्रित लैंग्वेज मॉडल है।
एनपीसीआई ने कहा कि फिमी को इंडियन पेमेंट सिस्टम की मुश्किलों को समझने के लिए बनाया गया है, जिसमें इंडिया का रियल टाइम पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भी शामिल है, साथ ही इससे जुड़े ट्रांजेक्शन डिस्प्यूट हैंडलिंग, पेमेंट मैंडेट्स का प्रबंधन और दूसरी चीजें भी शामिल हैं।
इस फीचर को एनपीसीआई यूपीआई हेल्प असिस्टेंट के तौर पर लॉन्च किया गया है। यह एक एआई आधारित कन्वर्सेशनल सपोर्ट सिस्टम है। यह असिस्टेंट इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी, तेलुगू, बंगाली जैसी भारतीय भाषाओं को भी सपोर्ट करता है और अगले छह से आठ महीनों में और भी भाषाओं को इसमें शामिल किया जाएगा।
बेंगलूरु की कैशफ्री पेमेंट्स ने कहा कि स्विगी और मास्टरकार्ड के साथ मिलकर उसका एआई ट्रांजेक्शन फीचर, कंपनियों को चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे बातचीत वाले इंटरफेस के अंदर पेमेंट लेने में मदद करता है। इसका मतलब है कि पेमेंट एक्सटेंशन एजेंटिक चैट इंटरफेस में होगा। फिनटेक क्षेत्र की बड़ी कंपनी रेजरपे ने मंगलवार को एजेंटिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म रेप्लिट के साथ भागीदारी की। इस भागीदारी से एआई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके बनाए गए उत्पाद यूपीआई और कार्ड पेमेंट जैसी नियमित भुगतान प्रणालियों को स्वीकार कर सकेंगे।