facebookmetapixel
DSP MF का नया Multi Asset Omni FoF लॉन्च, ₹100 से इक्विटी-डेट-गोल्ड में डायनैमिक निवेश का मौकाRBI से बैंकों की गुहार: लोन ग्रोथ तेज, जमा सुस्त, लिक्विडिटी नियमों में ढील की मांगSEBI ने मार्केट इंटरमीडिएटरीज के लिए ‘फिट एंड प्रॉपर पर्सन’ फ्रेमवर्क में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखाAMC Stocks में तेजी की गुंजाइश, ब्रोकरेज ने दिए 18–28% अपसाइड के टारगेट₹1,000 का लेवल टच करेगा ये Hotel Stock! मोतीलाल ओसवाल ने शुरू की कवरेज, 30% अपसाइड का टारगेटONGC, Oil India और BPCL क्यों बन रहे हैं ब्रोकरेज के फेवरेट? रिपोर्ट में 10% अपसाइड का संकेतInterest Rates: MPC में सरप्राइज नहीं होगा? नुवामा ने बताया RBI का अगला बड़ा दांव क्या हैAnthropic के नए टूल ने IT सेक्टर में मचाई खलबली! इंफोसिस से लेकर टीसीएस के शेयर धड़ाम, क्या करता है ये टूल ?Cement Sector: मांग और कीमतों में सुधार के बीच नुवामा की BUY कॉल, जेके सीमेंट बनी टॉप पिक25% उछलेगा अदाणी का यह शेयर, कंपनी की परफॉर्मेंस से ब्रोकरेज खुश; BUY की दी सलाह

तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन, 73 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

Last Updated- December 16, 2024 | 9:08 AM IST
The beats of Ustad Zakir Hussain's tabla will continue to resonate, President and Prime Minister expressed condolences गूंजती रहेगी उस्ताद जाकिर हुसैन के तबले की थाप, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक जताया

Ustad Zakir Hussain passes away: प्रसिद्ध तबला वादक जाकिर हुसैन का सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में निधन हो गया, उनके परिवार ने सोमवार को यह जानकारी दी। परिवार ने एक बयान में कहा कि हुसैन की मृत्यु ‘‘इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस’’ से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई। वह 73 वर्ष के थे। हुसैन पिछले दो सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था।

प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को हुआ था। उन्हें उनकी पीढ़ी के सबसे महान तबला वादकों में माना जाता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और उनकी बेटियां अनीशा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी हैं।

परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘‘वह दुनिया भर के अनगिनत संगीत प्रेमियों द्वारा संजोई गई एक असाधारण विरासत छोड़ गए हैं, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक बना रहेगा।’’

छह दशकों के अपने करियर में, हुसैन ने कई प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन गिटारवादक जॉन मैकलॉघलिन, वायलिन वादक एल शंकर और तालवादक टीएच ‘विक्कू’ विनायकराम के साथ 1973 में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी जैज संगीत के तत्वों के संलयन को काफी सराहा गया।

7 वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया

हुसैन ने मात्र सात वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया था और आगे चलकर उन्होंने पंडित रविशंकर, अली अकबर खान और शिवकुमार शर्मा जैसे दिग्गजों सहित भारत के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत कलाकारों के साथ काम किया। यो-यो मा, चार्ल्स लॉयड, बेला फ्लेक, एडगर मेयर, मिकी हार्ट और जॉर्ज हैरिसन जैसे पश्चिमी संगीतकारों के साथ उनके अभूतपूर्व संगीत ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया।

हुसैन ने अपने करियर में पांच ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जिनमें से तीन इस साल की शुरुआत में 66वें ग्रैमी पुरस्कार में मिले थे। भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। हुसैन के निधन के बारे में जानकारी मिलते ही मशहूर हस्तियों ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया।

First Published - December 15, 2024 | 10:07 PM IST

संबंधित पोस्ट