उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अवैध खनन से अपूरणीय क्षति हो सकती है, इसलिए वह अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक एवं समग्र जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली के पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया, ताकि विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। पीठ ने कहा कि समिति इस न्यायालय के निर्देशन और निगरानी में कार्य करेगी।
उच्चतम न्यायालय ने अपने उस आदेश को भी विस्तारित किया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार करने वाले 20 नवंबर के निर्देशों को स्थगित रखा गया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय को सूचित किया गया कि छिटपुट स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है, और पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया कि इस तरह का कोई भी अनधिकृत खनन नहीं होगा। अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद के बीच उच्चतम न्यायालय ने ‘अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा तथा उससे जुड़े मुद्दे’ शीर्षक से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों से होने वाला प्रदूषण सबसे अधिक जिम्मेदार है। इसके साथ ही, आयोग ने बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में सुधार के लिए 15 दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश की।
आयोग की ओर से न्यायालय में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली के पीठ को बताया कि 2015 से 2025 तक के अध्ययनों के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में पीएम 2.5 (हवा में 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास के कण) की मौजूदगी का कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के भीतर प्राथमिक उत्सर्जन (धूल, कार्बन मोनोऑक्साइड) और द्वितीयक कण का मिश्रण है। द्वितीयक कण वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड की सूर्य के प्रकाश, पानी या अन्य पदार्थों के साथ रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से बनते हैं।
सीएक्यूएम ने चरणबद्ध तरीके से कई उपायों को लागू करने की सिफारिश की। इनमें उत्सर्जन क्षमता के आधार पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से समयबद्ध तरीके से चरणबद्ध तरीके से हटाना। दूसरे, पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण के तहत) 2.0 को सुदृढ़ बनाना और सुदूर संवेदन उपकरणों के माध्यम से सड़क पर चलने वाले वाहनों की निगरानी करना। इसके अलावा दिल्ली और एनसीआर में अधिक मार्गों और स्टेशनों के साथ क्षेत्रीय रेल परिवहन और मेट्रो रेल नेटवर्क को विस्तारित करना और मेट्रो और क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली को जोड़ने वाले मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट केंद्रों का विकास करना।
इसके अलावा, गंतव्य-आधारित सार्वजनिक परिवहन ट्रैकिंग के साथ रियल टाइम यात्री सूचना प्रणाली के माध्यम से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना। * दिल्ली-एनसीआर में सभी वाहनों को शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए संबंधित इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों की समीक्षा और संशोधन करना। पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने के लिए उसके मालिकों को अधिक प्रोत्साहन राशि देना।