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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के सीमित उत्पादन की अनुमति दी, Delhi-NCR में बिक्री पर रोक बरकरार

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मान्य प्रमाणपत्र वाले निर्माता ग्रीन पटाखे बना सकेंगे; कोर्ट ने कहा — दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल बिक्री नहीं होगी, अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को

Last Updated- September 26, 2025 | 3:40 PM IST
Green crackers
प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन निर्माताओं को ग्रीन पटाखों के उत्पादन की अनुमति दी जिनके पास नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) से मान्य प्रमाणपत्र हैं। यह जानकारी लाइव लॉ की एक रिपोर्ट में दी गई।

हालांकि, पीठ ने साफ कहा कि इन पटाखों की बिक्री दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अगले आदेश तक नहीं की जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत

सुनवाई के दौरान Commission for Air Quality Management (CAQM) के वकील ने संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि बड़े पैमाने पर उपयोग से पहले ग्रीन पटाखों की संरचना की जांच और मंजूरी होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने पूछा कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था है। सरकारी वकील ने जवाब दिया कि NEERI की रिपोर्ट ग्रीन पटाखों को एक बार परीक्षण किए गए उत्पाद की तरह मानती है और बाजार में नियमित जांच का कोई तंत्र नहीं है।

निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि प्रतिबंध के चलते फैक्ट्रियां एक साल से बंद हैं। उन्होंने कहा, “अगर NEERI या PESO से मंजूरी मिलती है तो हमें निर्माण की अनुमति मिलनी चाहिए।” वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने स्पष्ट किया, “मैं कोई असीमित आदेश नहीं मांग रहा हूं, बस इतना चाहता हूं कि हमें अपने उत्पाद देश के अन्य हिस्सों में बेचने की इजाजत हो।”

Also Read: सुपरटेक समेत कई बिल्डरों पर शिकंजा, सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच को दी हरी झंडी

बैन का पालन मुश्किल से हो रहा”

पीठ ने लागू करने में खामियों पर टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, “इस बैन का मुश्किल से ही पालन हो रहा है।” एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने जोड़ा कि CAQM की रिपोर्ट कहती है कि बाजार में जांच का कोई तंत्र नहीं है, फिर भी हटाने की मांग की जा रही है।

सीजेआई ने निष्कर्ष में कहा, “जरूरी है कि संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए,” और सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं तथा निर्माताओं के हितों में संतुलन पर जोर दिया।

पहले मांगी गई थी रिपोर्ट

इससे पहले शीर्ष अदालत ने पटाखा निर्माताओं के संघ की याचिका पर CAQM और NEERI से रिपोर्ट मांगी थी। संघ ने तर्क दिया था कि संपूर्ण प्रतिबंध से उद्योग और लाखों मजदूरों की आजीविका संकट में पड़ गई है। उन्होंने कहा था कि वे विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा तय किसी भी ग्रीन मानक का पालन करने को तैयार हैं।

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First Published - September 26, 2025 | 3:23 PM IST

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