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FY24 में निजी कोयला उत्पादन 14 करोड़ टन के पार, मंत्रालय को खनन में बढ़ोतरी की उम्मीद

भारत की योजना 2030 तक कोयले के उत्पादन की क्षमता को बढ़ाकर 2 अरब टन करने की है। उम्मीद यह की जा रही है कि ऐसा होने पर मांग से अधिक उत्पादन होगा।

Last Updated- April 03, 2024 | 10:00 PM IST
Coal import

वित्त वर्ष 2023-24 में निजी क्षेत्र को आवंटित कोयले का उत्पादन 14.7 करोड़ टन तक पहुंच गया है। निजी क्षेत्र को ‘कैप्टिव’ (अपने इस्तेमाल) और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए कोयला खदान दी गई थीं। सरकारी बयान में बुधवार को बताया गया कि वित्त वर्ष 2022-23 के 11.6 करोड़ टन की तुलना में वित्त वर्ष 24 में 27 फीसदी अधिक उत्पादन हुआ।

कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 23 में 11 करोड़ टन कोयला भेजा गया था और यह वित्त वर्ष 24 में 30 प्रतिशत बढ़कर 14.3 करोड़ टन हो गया। 31 मार्च, 2024 को 58 कोयला खानों में उत्पादन हुआ जबकि 31 मार्च, 2023 में 49 खानों में उत्पादन हुआ। वित्त वर्ष 24 में नौ कोयला खदानों का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ जिसमें चार कैप्टिव खानें और पांच वाणिज्यिक खानें हैं।

कोयले के कुल उत्पादन 14.72 करोड़ टन में ऊर्जा क्षेत्र की कैप्टिव खानों का उत्पादन 12.13 करोड़ टन था, गैर बिजली क्षेत्र की कैप्टिव खानों का उत्पादन 84 लाख टन और वाणिज्यिक खानों का उत्पादन 1.75 करोड़ टन था। ये कैप्टिव खानें बीते आठ वर्षों में निजी कंपनियों और राज्य संचालित उपयोग के लिए दी जाती हैं।

ऐसा इसलिए शुरू किया गया था जब वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उस समय बीते दशकों के दौरान सभी कोयला ब्लॉक के आवंटन निरस्त कर दिए थे। कोयला मंत्रालय ने निजी क्षेत्र के लिए तीन वर्ष पहले कोयला खनन का क्षेत्र खोला था।

कोयला मंत्रालय 64 खानों की वाणिज्यिक नीलामी कर चुका है। कोयला मंत्रालय को उम्मीद है कि कोयला का निजी खनन गति पकड़ेगा। इससे देश को कोयले का अधिशेष स्टॉक बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा कोयले के सबसे बड़े उत्पादक व वितरक राष्ट्रीय खनक कोल इंडिया लिमिटेड पर दबाव कम होगा।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने हाल में जानकारी दी थी कि भारत की योजना 2030 तक कोयले के उत्पादन की क्षमता को बढ़ाकर 2 अरब टन करने की है। उम्मीद यह की जा रही है कि ऐसा होने पर मांग से अधिक उत्पादन होगा। इससे बफर स्टॉक बनाने में मदद मिलेगी।

First Published - April 3, 2024 | 10:00 PM IST

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