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अब ट्रेन के कंबल में कवर भी लगा मिलेगा! भारतीय रेलवे ने यात्रियों के स्वच्छ यात्रा के लिए लिया फैसला

रेलवे ने बयान जारी कर कहा कि यह नई व्यवस्था सफाई को बढ़ावा देगी, साथ ही यूनिफॉर्मिटी आएगी और यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा

Last Updated- October 20, 2025 | 5:35 PM IST
Indian Railway
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सफाई और आराम को ध्यान में रखते हुए एक नई योजना शुरू की है। इस योजना को बीते गुरुवार को पायलट प्रोजेक्ट के तहत लॉन्च किया गया है। इसके तहत अब AC कोच में सफर करने वाले लोगों को ब्लैंकेट कवर दिए जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि यह कदम यात्रा को ज्यादा सुरक्षित, साफ और आरामदायक बनाने के लिए उठाया गया है।

इसको लेकर पहले से यात्रियों की कई शिकायतें आ रही थीं। ब्लैंकेट को चादर और तकिए के कवर जितनी बार नहीं धोया जाता था। मंत्री ने बताया कि रेलवे में ब्लैंकेट सालों से इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन लोगों के मन में हमेशा शक रहता था। इस शक को दूर करने के लिए अब ब्लैंकेट कवर दिए जा रहे हैं। ये कवर प्रिंटेड होंगे और सभी AC क्लास में इसकी सुविधा मिलेगी। इसकी शुरुआत जयपुर-असरवा एक्सप्रेस से हो रही है, अगर यह कामयाब रहा, तो पूरे देश की ट्रेनों में इसे लागू किया जाएगा।

रेलवे ने बयान जारी कर कहा कि यह नई व्यवस्था सफाई को बढ़ावा देगी और साथ ही यूनिफॉर्मिटी आएगी। इससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा। मंत्री ने लॉन्च के दौरान कहा कि यह यात्रियों की पुरानी मांग पूरी कर रहा है। अब ब्लैंकेट ज्यादा साफ-सुथरे रहेंगे।

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ब्लैंकेट कितनी बार धोए जाते हैं?

पिछले साल नवंबर में रेल मंत्री ने लोकसभा में इस बारे में जानकारी दी। कांग्रेस सांसद कुलदीप इंदोरा ने सवाल पूछा था कि क्या ब्लैंकेट महीने में सिर्फ एक बार धोए जाते हैं? जबकि यात्री बेडिंग के लिए पैसे देते हैं और सफाई की उम्मीद करते हैं। वैष्णव ने लिखित जवाब में कहा कि ब्लैंकेट कम से कम महीने में एक बार जरूर धोए जाते हैं।

इसके अलावा उन्होंने रेलवे में इस्तेमाल होने वाले नए ब्लैंकेट की खासियतें भी बताईं। उन्होंने कहा कि ये हल्के होते हैं और इन्हें धोना आसान है। यात्रियों को अच्छी गर्माहट देते हैं। कुल मिलाकर सफर आरामदायक बनाते हैं। मंत्री ने और भी कई कदमों का जिक्र किया। इसके अलावा रेलवे ने नए लिनेन सेट खरीदे हैं। ये BIS मानकों के मुताबिक बेहतर क्वालिटी के हैं। मशीनीकृत लॉन्ड्रीज लगाई गई हैं, इससे लिनेन साफ-सुथरा रहता है।

इसके अलावा बेडरोल की पैकेजिंग पर्यावरण के अनुकूल की गई है। स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, लोडिंग और अनलोडिंग के लिए बेहतर सिस्टम अपनाया गया है। स्टेशनों और ट्रेनों में यह सब सुविधाजनक तरीके से होता है। रेलवे का कहना है कि ये सब बदलाव यात्रियों की सुरक्षा और आराम के लिए हैं। अब ब्लैंकेट कवर से सफाई का स्तर और ऊपर जाएगा। जयपुर-असरवा एक्सप्रेस में यह ट्रायल चल रहा है। रेलवे देखेगा कि यात्री क्या फीडबैक देते हैं और अगर अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो जल्दी ही अन्य ट्रेनों में भी यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे यात्रियों को अब ब्लैंकेट की सफाई पर शक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेलवे मंत्री ने कहा कि रेलवे लगातार ऐसे बदलाव ला रहा है जिससे रेल यात्रियों के लिए सफर भरोसेमंद बने।

First Published - October 20, 2025 | 5:05 PM IST

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