facebookmetapixel
Advertisement
किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: पीएम मोदी ने जारी की PM-Kisan की 23वीं किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटसकेंद्र सरकार ने 16 FDC दवाओं पर लगाया परमानेंट बैन, कई स्किन क्रीम और एंटीबायोटिक भी लिस्ट मेंसावधान! ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का हुए शिकार तो तुरंत करें ये काम, वरना डूब जाएगा पूरा पैसा; जानें RBI के नियमDividend Stocks: टाटा पावर और LIC समेत ये 31 कंपनियां अगले हफ्ते बांटेंगी मुनाफा, देखें पूरी लिस्टट्रंप ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले: 150 करोड़ लोगों का यह नेता है असली ‘टफ कुकी’NEET UG 2026: नागपुर के छात्र को मिला अबू धाबी का परीक्षा केंद्र, NTA की लापरवाही से परिवार परेशानBonus Stocks Alert: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की चमकेगी किस्मत, मिलेंगे मुफ्त में शेयरOMC को भारी चपत: तेल कंपनियों को लगा ₹22,000 करोड़ का बड़ा झटका, बाजार से कम दाम पर बेची रसोई गैसCrude Oil Import: पश्चिम एशिया संकट की भारी चपत, बराबर तेल खरीदने के बाद भी 81.5% बढ़ा भारत का खर्चRBI Regulatory Action: विदेश से जुटाई उधारी की रोज देनी होगी जानकारी, RBI ने बैंकों को दिया कड़ा निर्देश

Gaganyaan mission के लिए ECLSS खुद विकसित करेगा इसरो : सोमनाथ

Advertisement

गगनयान परियोजना के अंतर्गत इसरो एक मानव चालक दल को 400 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की कक्षा में भेजेगा और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए समुद्र में उनकी लैंडिंग कराएगा

Last Updated- December 13, 2023 | 5:03 PM IST
Gaganyaan Mission
Representative Image

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने बुधवार को कहा कि आगामी मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए ‘पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली’ (ईसीएलएसएस) अन्य देशों से नहीं मिलने के बाद अंतरिक्ष एजेंसी ने इसे खुद विकसित करने का फैसला किया है। गगनयान परियोजना के अंतर्गत इसरो एक मानव चालक दल को 400 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की कक्षा में भेजेगा और फिर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए समुद्र में उनकी लैंडिंग कराई जाएगी।

गगनयान को 2025 में प्रेक्षपित किए जाने की उम्मीद है। सोमनाथ ने कहा, ”हमें पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली को विकसित करने का अनुभव नहीं है। हम सिर्फ और सिर्फ रॉकेट और उपग्रह की रचना करते हैं। हमने सोचा था कि इस तरह की जानकारी को दूसरे देशों से प्राप्त कर लेंगे लेकिन दुर्भाग्यवश ढेर सारी चर्चाओं के बाद भी कोई देश हमें ये देने का इच्छुक नहीं है।”

सोमनाथ गोवा के विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम ‘मनोहर पर्रिकर विज्ञान महोत्सव 2023’ के 5वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम गोवा के डोना पाउला में आयोजित किया गया। सोमनाथ ने कहा कि इसरो ने अब खुद से ईसीएलएसएस विकसित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ”हम हमारे पास मौजूद ज्ञान और उद्योगों का उपयोग करके इसे भारत में विकसित करने जा रहे हैं।”

गगनयान कार्यक्रम के समक्ष चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि भारत पिछले कई वर्षों से निर्माण डिजाइन क्षमता को विकसित करने के लिए ज्ञान अर्जित करने में लगा हुआ है और इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम होने जा रहा है। उन्होंने कहा, ”जब हम अपने गगनयान कार्यक्रम के माध्यम से मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजें तो मुझे लगता है कि हमारे पास कौशल व आत्मविश्वास वर्तमान में मौजूद कौशल व आत्मविश्वास से कहीं अधिक होना चाहिए।”

Advertisement
First Published - December 13, 2023 | 5:03 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement