facebookmetapixel
Advertisement
Stocks to Watch Today: IREDA से लेकर RIL और Infosys तक, शुक्रवार को इन 10 स्टॉक्स में रखें नजरअगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटाया

रूसी तेल से दूरी: भारतीय रिफाइनरियों ने बदला रुख, दिसंबर में आयात में भारी गिरावट की आशंका

Advertisement

एक रिफाइनिंग सूत्र ने बताया कि अमेरिका के हालिया प्रतिबंधों के बाद बैंकों की कड़ी जांच के कारण भारत की सरकारी रिफाइनरियां बहुत ज्यादा सतर्क हो गई हैं

Last Updated- November 25, 2025 | 4:55 PM IST
Russian oil imports

India’s Russian oil imports: भारत की रूस से तेल खरीद दिसंबर में तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने वाली है। नवंबर में यह खरीद कई महीनों के हाई पर थी, लेकिन अब रिफाइनरियों ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए दूसरे विकल्पों की तरफ रुख किया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन (EU) और अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर अपने प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। अमेरिका के ताजा प्रतिबंध रूस की प्रमुख कंपनियों रोजनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर लगाए गए हैं। रूसी तेल खरीदने वाली कंपनियों को 21 नवंबर तक इन दोनों कंपनियों के साथ अपना कारोबार खत्म करने के लिए कहा गया था।

इसके अलावा, यूरोपीय यूनियन ने 21 जनवरी की समयसीमा तय की है। इस तारीख के बाद यूरोपीय यूनियन उन रिफाइनरियों का ईंधन नहीं खरीदेगा, जिन्होंने बिल ऑफ लैंडिंग की तारीख से 60 दिनों के भीतर रूसी तेल का उपयोग किया हो।

Also Read: निफ्टी-50 की टॉप कंपनियों का मुनाफा चार तिमाहियों से पीछे, मिड-स्मॉलकैप का दबदबा बढ़ा

बैंकों की जांच से सतर्कता बढ़ी

एक रिफाइनिंग सूत्र ने बताया कि अमेरिका के हालिया प्रतिबंधों के बाद बैंकों की कड़ी जांच के कारण भारत की सरकारी रिफाइनरियां बहुत ज्यादा सतर्क हो गई हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर में भारत को 6 लाख से 6.5 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल मिलने की संभावना है।

स्रोत ने भारतीय कंपनियों की शुरुआती योजनाओं का हवाला देते हुए बताया कि इनमें इंडियन ऑयल, नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए नवंबर में लोड किए गए कुछ कार्गो की डिलीवरी शामिल है।

केप्लर के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने भारत को 18.7 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल मिलने का अनुमान है। अक्टूबर में भारत ने 16.5 लाख बैरल प्रति दिन रूसी तेल आयात किया, जो सितंबर की तुलना में 2% ज्यादा था।

एक ट्रेड सोर्स ने नाम न बताने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया, “नवंबर में रूस से तेल की सप्लाई ज्यादा रहने की उम्मीद है क्योंकि कई रिफाइनरियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों की समय-सीमा से पहले ही अपना स्टॉक भरने की कोशिश की। इसके अलावा, 2026 से EU बाजार के लिए तेल उत्पाद बनाने में गैर-रूसी तेल का इस्तेमाल अनिवार्य होने वाले नियम के कारण भी कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं।”

Also Read: Chemical Stock: स्टॉक स्प्लिट + बोनस का डबल धमाका! शेयर लगातार दूसरे दिन 5% उछला, एक महीने में 130% रिटर्न

भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीदारी रोकी

ज्यादातर भारतीय रिफाइनरियां—जैसे मेंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL)—ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है।

सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि वे केवल उन कंपनियों से तेल खरीदेंगी, जो प्रतिबंधित नहीं हैं। नायरा एनर्जी, जिसमें रोजनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है, अब केवल रूसी तेल ही प्रोसेस कर रही है क्योंकि ब्रिटेन और EU के प्रतिबंधों के बाद अन्य सप्लायर पीछे हट गए हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा है कि उसने 22 अक्टूबर तक तय किए गए रूसी तेल कार्गो लोड कर लिए हैं। और 20 नवंबर के बाद आने वाले किसी भी कार्गो को वह अपनी उस रिफाइनरी में प्रोसेस करेगी, जो घरेलू बाजार के लिए ईंधन बनाने के लिए तैयार की गई है। दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का चलाने वाली रिलायंस की दो रिफाइनरियां हैं—जिनमें से एक सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए है।

अक्टूबर में भारत के तेल आयात में अमेरिकी तेल की हिस्सेदारी जून 2024 के बाद सबसे ज्यादा हो गई, क्योंकि रिफाइनरियों ने कीमतों में अंतर (आर्बिट्राज) का फायदा उठाया।

भारत पर भी अमेरिका से ज्यादा एनर्जी खरीदने का दबाव है, क्योंकि अमेरिका ने भारतीय आयातों पर टैरिफ को दोगुना करके 50% कर दिया है। इसका कारण यह है कि भारत रूसी तेल खरीद रहा है।

Advertisement
First Published - November 25, 2025 | 3:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement