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भारत-रूस 2030 आर्थिक साझेदारी: मिलकर व्यापार बाधाएं करेंगे दूर, ट्रेड 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

दोनों देशों के बीच शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं हटाने, संपर्क बढ़ाने व्यवसायों के बीच नियमित बातचीत से हासिल होंगे नए व्यापार लक्ष्य

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असित रंजन मिश्र   
Last Updated- December 05, 2025 | 11:01 PM IST

भारत और रूस 2030 तक आर्थिक सहयोग के लिए संयुक्त कार्यक्रम पर सहमत हुए। इसका लक्ष्य मुख्य रूप से रूस द्वारा गैर-टैरिफ बाधाओं और नियामकीय अड़चनों को दूर कर भारतीय निर्यात का विस्तार करते हुए द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि शुल्क और गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को दूर करना, लॉजिस्टिक्स में अड़चनें हटाना, आपसी आवाजाही को बढ़ावा देना, सुचारू भुगतान तंत्र सुनिश्चित करना, बीमा और पुनर्बीमा के मुद्दों के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजना तथा दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नियमित बातचीत आदि ऐसे तत्व हैं जिनसे द्विपक्षीय व्यापार के नए लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सकता है।

शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान अपने संबोधन में पुतिन ने कहा कि व्यापक रोडमैप से दिशानिर्देश पूरी तरह स्पष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे अंतर-सरकारी आयोग और संबंधित आर्थिक मंत्रालयों एवं एजेंसियों को वस्तुओं त​था पूंजी के प्रवाह में बाधाएं दूर करने, संयुक्त औद्योगिक परियोजनाएं लागू करने और प्रौद्योगिकी एवं निवेश में आपसी सहयोग बढ़ाने का काम सौंपा गया है।’

मोदी ने अपने बयान में कहा कि द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ‘इसे साकार करने के लिए हम 2030 तक एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर सहमत हुए हैं। इससे हमारा व्यापार और निवेश अधिक विविधतापूर्ण, संतुलित और टिकाऊ होगा तथा हमारे सहयोग के क्षेत्रों में नए आयाम भी जुड़ेंगे।’

पुतिन ने कहा कि पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार में 12 प्रतिशत की और वृद्धि हुई थी, जो एक नया रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि अनुमान थोड़े अलग हैं, लेकिन इस बात पर आम सहमति है कि द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ा 64 से 65 अरब डॉलर के बीच रहेगा। हमारा अनुमान है कि वर्ष के अंत तक व्यापार एक समान स्तर पर रहेगा।’

रूस और भारत ने द्विपक्षीय व्यापार को निर्बाध रूप से आगे जारी रखने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग के माध्यम से द्विपक्षीय निपटान प्रणालियों को संयुक्त रूप से विकसित करना जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की है। वे राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों, वित्तीय मैसेजिंग प्रणालियों और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा प्लेटफार्मों की अंतर-क्षमता को बढ़ाने पर विचार-विमार्श जारी रखने पर भी सहमत हुए।

शिखर सम्मेलन के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि आर्थिक सहयोग एक प्रेरक शक्ति है और राष्ट्रपति पुतिन की इस विशेष यात्रा का सबसे महत्त्वपूर्ण केंद्र बिंदु है। उन्होंने कहा, ‘फार्मास्युटिकल्स, कृषि, समुद्री उत्पादों और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने से व्यापार असंतुलन को दूर करने में मदद मिलेगी। बैठक के दौरान इन क्षेत्रों पर दोनों नेताओं के बीच काफी विस्तार से चर्चा हुई।’

मिस्री ने कहा कि दोनों देश राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘लगभग दो दर्जन बैंकों ने बड़ी संख्या में विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते खोले हैं। ये दोनों आपसी व्यापार प्रवाह को सुगम बनाने में बहुत सहायक हैं।’

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक रुपया-रूबल निपटान प्रणाली के बिना रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता तो बना रह सकता है, लेकिन यह एक गंभीर निर्यात बाजार नहीं बन सकता। उन्होंने कहा, ‘रूसी बैंकों के स्विफ्ट से काफी हद तक बाहर होने के कारण निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी बाधा भुगतान की है, जिससे सौदे धीमे, महंगे और अनिश्चित हो रहे हैं। आगे बढ़ने का एक तरीका स्थानीय-मुद्रा निपटान पर व्यापक जोर देना है, जिसे विश्वसनीय समाशोधन व्यवस्था और भारतीय और रूसी बैंकों की अधिक भागीदारी का समर्थन हासिल है।’

First Published : December 5, 2025 | 10:32 PM IST