भारत और अमेरिका की अगले 4-5 दिन में संयुक्त बयान जारी करने की योजना है, जिसमें व्यापार समझौते की पहली किस्त को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद व्हाइट हाउस एक कार्यकारी आदेश जारी करेगा जिसके तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी हो जाएगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज इसकी जानकारी दी।
गोयल ने कहा कि संयुक्त बयान के बाद भारत और अमेरिका के बीच औपचारिक ‘कानूनी’ व्यापार समझौते की पहली किस्त पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। समझौते के पहले चरण पर दोनों देशों के बीच चर्चा को संयुक्त बयान के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा, जिसमें आपसी समझ और समझौते के प्रमुख पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
गोयल ने कहा, ‘संयुक्त बयान के आधार पर औपचारिक समझौता तैयार किया जाएगा, जिसे अंतिम रूप देने में एक या डेढ़ महीने लग सकते हैं। हमारा लक्ष्य मार्च के मध्य तक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर करना है।’
समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत उन उत्पादों पर शुल्क कम करेगा जिन पर व्यापार करार के तहत सहमति बनी है। कानूनी समझौते के बाद भारत सरकार को शुल्क हटाने और कटौती लागू करने का अधिकार मिल जाएगा। भारत के शुल्क सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र वाली दरें हैं, जिसे व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने के बाद ही बदला जा सकता है।
गोयल ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हम चीजों को तेजी से करेंगे क्योंकि कानूनी करार के बाद हमें और रियायतें मिलेंगी।’ यह भारत द्वारा बीते 5 साल में किया गया 9वां व्यापार समझौता होगा। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत पिछले साल मार्च में शुरू हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को भारत के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के लिए अमेरिका में शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा। यह समझौता अमेरिका द्वारा कई भारतीय निर्यात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के 5 महीने बाद आया है, जिसमें रूसी तेल की भारत की खरीद के लिए 25 फीसदी का दंडात्मक शुल्क भी शामिल है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत का अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने का इरादा है, जिसमें तेल और गैस, हवाई जहाज और पुर्जे, कीमती धातुएं और हीरे, टेक उत्पाद जैसे हाई-टेक चिप और सर्वर उत्पाद आदि शामिल होंगी। इसमें डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 20 अरब डॉलर के तकनीकी उत्पाद भी शामिल होंगे।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘जब हमने अनुमान लगाया कि हमें अमेरिका से क्या चाहिए तो हम कम से कम 500 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंचे। अकेले हमारे विमान की मांग (बोइंग को दिए गए ऑर्डर) लगभग 70 से 80 अरब डॉलर है। यदि आप इंजन या अन्य कलपुर्जों को शामिल करें तो यह 100 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। बजट में डेटा सेंटर को भारी रियायतें दी गई हैं। यदि हमें डेटा सेंटर में 100-150 अरब डॉलर का निवेश मिलता है तो हमें उनके लिए उपकरणों की आवश्यकता होगी।’
वाणिज्य विभाग की गणना के अनुसार भारत की इन वस्तुओं की वर्तमान वैश्विक खरीद सालाना 300 अरब डॉलर से अधिक है और अगले पांच वर्षों में 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद से भारत की आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी।
अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने के भारत के इरादे को समझाते हुए गोयल ने बताया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रयास में ऊर्जा, विमानन, डेटा सेंटर और परमाणु ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में क्षमता विस्तार की आवश्यकता होगी। चूंकि अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है इसलिए भारत व्यापार संभावनाओं का पता लगाएगा जो आयात और निर्यात दोनों को बढ़ावा देगा। उन्होंने इसके बारे में संसद को भी सूचित किया है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया और 45.6 अरब डॉलर के सामान का आयात किया।