भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए। यह समझौता वार्ता को फिर से शुरू करने की घोषणा के तीन साल के बाद हुआ है। टीओआर एफटीए के दायरे और तौर-तरीकों को परिभाषित करता है।
जीसीसी क्षेत्रीय, अंतर सरकारी राजनीतिक आर्थिक संघ है। इस संघ में छह देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। यदि यह सौदा अपना अंतिम रूप प्राप्त कर लेता है तो पश्चिम एशिया के साथ भारत के आर्थिक व रणनीतिक संबंधों को मजबूत होंगे। भारत और जीसीसी ने 21 साल से भी पहले एफटीए की संभावना तलाशने के लिए आर्थिक सहयोग पर समझौता किया था।
इसके बाद वर्ष 2006 और वर्ष 2008 में दो दौर की बातचीत हुई थी। दो दौर की वार्ता के बाद आर्थिक संघ ने सभी देशों और समूहों समूहों के साथ अपनी बातचीत स्थगित कर दी थी। फिर नवंबर 2022 में भारत और जीसीसी देशों ने एफटीए वार्ता को फिर से शुरू करने के इरादे की घोषणा की थी। हालांकि, संदर्भ की शर्तों पर असहमति के कारण वार्ता शुरू होने में देरी हुई।
वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता वैश्विक भलाई के लिए बड़ा मददगार होगा और दोनों पक्षों के लिए पूर्वानुमान व स्थिरता लाएगा। एफटीए वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को भी सक्षम करेगा। यह नौकरी के अवसरों का विस्तार करेगा और क्षेत्र के लिए भोजन व ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देते हुए निवेश आकर्षित करेगा।
गोयल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 6 राष्ट्र जीसीसी (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के साथ हमारे संबंध रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं और वे नई व बड़ी ऊंचाइयों की ओर हैं।’