facebookmetapixel
Advertisement
पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स बेहाल, 5 घंटे काम बंद रखकर जताएंगे विरोधNPS सब्सक्राइबर्स को बड़ी राहत: अब गंभीर बीमारी में सरेंडर कर सकेंगे एन्युटी पॉलिसी, नियमों में हुआ बदलावExplainer: क्यों बढ़ रहा है टाटा संस पर पब्लिक होने का दबाव? अंदरूनी कलह व RBI के नियमों का पूरा सचDividend Stocks: अगले हफ्ते L&T और Havells समेत ये 18 कंपनियां करेंगी पैसों की बारिश, देखें पूरी लिस्टभारतीयों के लिए दुबई में घर खरीदना होगा आसान, रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा खत्मआसमान में भारत की ताकत बढ़ाने की जरूरत, वायुसेना ने ‘घातक’ स्टेल्थ ड्रोन कार्यक्रम को तेज करने पर दिया जोरनिवेशकों की ऊंची यील्ड की मांग के आगे झुका नाबार्ड, 7,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड इश्यू लिया वापसडीजल की महंगाई से ट्रांसपोर्टर्स बेहाल, माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी की तैयारी; ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असरब्रिटेन के नए स्टील नियमों से अटका भारत का मेगा व्यापार सौदा, FTA लागू होने में हो सकती है देरीरिकॉर्ड तोड़ रफ्तार: पश्चिम एशिया संकट के बावजूद अप्रैल में भारत का निर्यात 13.8% उछला

ईवी निवेश की नीति में चार्जिंग ढांचा भी होगा शामिल‌!

Advertisement

इस नीति के तहत उन्हें एक विनिर्माण संयंत्र बनाने के लिए तीन साल में 50 करोड़ डॉलर का निवेश करने की जरूरत थी।

Last Updated- February 23, 2025 | 10:28 PM IST
Govt mulls including charging infrastructure in EV investment mandate EV पॉलिसी में बड़ा बदलाव संभव! चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को मिलेगी जगह, Tesla समेत ग्लोबल कंपनियों को होगा फायदा?

सरकार चार्जिंग के बुनियादी ढांचा नेटवर्क के निर्माण में निवेश को भी शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है ताकि वैश्विक कंपनियां पिछले साल घोषित नीति के तहत निवेश की अपनी पात्रता के मानदंडों को आसानी से पूरा कर सकें। इस नीति के तहत उन्हें एक विनिर्माण संयंत्र बनाने के लिए तीन साल में 50 करोड़ डॉलर का निवेश करने की जरूरत थी। बदले में उन्हें देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के आयात के लिए रियायती शुल्क मिलता। 

पिछले साल मार्च में घो​षित इस नीति को मोटे तौर पर टेस्ला को लुभाने के प्रयास के रूप में देखा गया (अलबत्ता विनफास्ट और जगुआर लैंड रोवर के जरिये टाटा के साथ-साथ बीएमडब्ल्यू जैसी अन्य कंपनियों ने भी इस पर विचार किया था)। हालांकि यह नीति संभावित वैश्विक कार विनिर्माताओं को लुभाने में विफल रही। लिहाजा, भारी उद्योग मंत्रालय को हितधारकों के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करनी पड़ी। कई लोगों ने तर्क दिया कि ईवी संयंत्रों में मौजूदा निवेश को भी नीति में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वर्तमान ढांचे में जल्द निकलने वाली कंपनियों पर दंड लगता है जबकि यह उन नई कंपनियों को लाभ पहुंचाता है जिन्होंने देश के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तंत्र में कोई निवेश नहीं किया है। इस नीति के तहत कंपनियों को तीन साल के भीतर संयंत्र स्थापित करना था और संचालन के पांचवें वर्ष तक देसी पुर्जों के इस्तेमाल का 50 प्रतिशत स्तर हासिल करना था। आयात किए जाने वाले ईवी की संख्या भी सीमित थी।

बदले में सरकार इच्छुक ईवी विनिर्माताओं के लिए आयात शुल्क 15 प्रतिशत तक कम करने पर सहमत हो गई थी। यह उन वाहनों के लिए था जो अनुमोदन की तारीख से पांच वर्षों की अवधि के दौरान 35,000 डॉलर और उससे अधिक की लागत, बीमा और ढुलाई (सीआईएफ) कीमत वाले वाहन आयात करते थे। इसे पहले लगाए गए 70 प्रतिशत और 100 प्रतिशत से कम किया गया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हितधारकों के साथ बातचीत के बाद हम एक विनिर्माण इकाई स्थापित करने के अलावा चार्जिंग स्टेशनों में निवेश को भी शामिल करके निवेश मानदंडों को आसान बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं।’

Advertisement
First Published - February 23, 2025 | 10:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement