facebookmetapixel
Advertisement
RCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुखसंघर्ष बढ़ने के भय से कच्चे तेल में 4% की उछाल, कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर के पारGold Rate: तेल महंगा होने से सोना 2% फिसला, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोरEditorial: दिवालिया समाधान से CSR और ऑडिट सुधार तक बड़े बदलावसरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत​युद्ध और उभरती भू-राजनीतिक दरारें: पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दियापीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन; यूपी में पर्यटन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को नई उड़ान

BS मंथन समिट में बोले भूपेंद्र यादव – भारत जलवायु समाधान का हिस्सा बनेगा, समस्या का नहीं

Advertisement

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा – भारत जलवायु समाधान का हिस्सा बनना चाहता है, आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ हर व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जरूरी

Last Updated- February 27, 2025 | 5:58 PM IST
Bhupendra Yadav

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने BS मंथन समिट में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) पर भारत की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक पर्यावरणीय प्रयासों में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।

भारत अपने जलवायु लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर रहा है

भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत एकमात्र G20 देश है जिसने अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा किया है। उन्होंने कहा, “भारत समस्या का नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनना चाहता है।” भारत ने पेरिस समझौते के तहत 8 राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य तय किए थे, जिनमें से 3 लक्ष्य मात्रात्मक (quantitative) और 5 गुणात्मक (qualitative) थे। भारत ने इन लक्ष्यों में से 2 महत्वपूर्ण लक्ष्य 9 साल पहले ही पूरे कर लिए।

ग्लोबल साउथ और ग्लोबल नॉर्थ दोनों को मिलकर काम करना होगा

यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, “पर्यावरणीय परिवर्तन सिर्फ ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल नॉर्थ (विकसित देशों) को भी इसका प्रभाव झेलना होगा। हमें नेट जीरो लक्ष्य तक पहुंचना होगा, लेकिन हर व्यक्ति को ऊर्जा तक पहुंच भी मिलनी चाहिए।”

विकसित देशों को निभानी होगी अपनी ज़िम्मेदारी

पर्यावरण मंत्री ने विकसित देशों की ज़िम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि “जिन देशों ने ऐतिहासिक रूप से अधिक कार्बन उत्सर्जन किया है, उन्हें विकासशील देशों की मदद करनी होगी।” उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।

भारत की वैश्विक पहलें

भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

  • इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) – भारत और फ्रांस की इस पहल में 137 देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
  • CDRI (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) – भारत और इंग्लैंड की इस पहल का मकसद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाना है।
  • लीडरशिप फॉर इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन – भारत और स्वीडन ने मिलकर यह पहल शुरू की है, जिसका लक्ष्य उद्योगों को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाना है।

जलवायु परिवर्तन पर चर्चा सालभर होनी चाहिए

भूपेंद्र यादव ने कहा कि “जलवायु परिवर्तन पर सिर्फ एक महीने बात करके इसे भुला देना ठीक नहीं है। यह मुद्दा हर सेक्टर को प्रभावित करता है, इसलिए हमें सतत चर्चा और प्रयास करने होंगे।” उन्होंने बताया कि भारत में एक समन्वय समिति (coordination committee) बनाई गई है जो यह सुनिश्चित करेगी कि हर क्षेत्र में ग्रीन ग्रोथ को बढ़ावा मिले।

यादव ने यह भी बताया कि जलवायु एक्शन सिर्फ संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP) तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “COP सिर्फ एक बैठक नहीं है, इसके पहले कई वैज्ञानिक और नीतिगत चर्चाएं होती हैं। हमें सालभर इस पर काम करने की जरूरत है।”

Advertisement
First Published - February 27, 2025 | 5:54 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement