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अटल सेतु: भारत के सबसे लंबे समुद्री पुल पर एक साल में रोज औसतन 22,689 गाड़ियां चली, जानिए क्या है इसकी खासियत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी 2024 को इस 22 किमी लंबे पुल का उद्घाटन किया था। यह पुल मुंबई के शिवड़ी को नवी मुंबई के चिरले से जोड़ता है।

Last Updated- January 14, 2025 | 7:58 AM IST

भारत के सबसे लंबे समुद्री पुल, अटल सेतु (पहले मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक या MTHL), का उद्घाटन हुए एक साल पूरा हो चुका है। इस दौरान पुल ने औसतन 22,689 गाड़ियों का दैनिक ट्रैफिक दर्ज किया, जो शुरुआती अनुमानों से कम है। उम्मीद की जा रही थी कि पुल प्रतिदिन 56,000 से अधिक वाहनों का भार संभाल सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी 2024 को इस 22 किमी लंबे पुल का उद्घाटन किया था। यह पुल मुंबई के शिवड़ी को नवी मुंबई के चिरले से जोड़ता है और राज्य में एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। ठाणे क्रीक के ऊपर बने इस पुल ने बीते एक साल में 83,06,009 वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाया है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के मुताबिक, पुल ने मुंबई और नवी मुंबई के बीच यात्रा को तेज और आसान बना दिया है।

पुल पर अब तक औसतन 57,525 वाहनों के दैनिक ट्रैफिक की उम्मीद थी। लेकिन परियोजना में देरी के कारण इस पुल को 2024 में शुरू किया गया। इसके अलावा, 2031 तक पुल पर प्रतिदिन 88,550 वाहनों के ट्रैफिक का अनुमान है। उद्घाटन के बाद 14 जनवरी 2024 को इस पुल ने 61,807 वाहनों का उच्चतम दैनिक ट्रैफिक रिकॉर्ड दर्ज किया था।

बीते एक साल में, अटल सेतु से कुल 77,28,149 कारें, 99,660 मिनी बस और हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCVs), 1,17,604 बसें और दो-अक्ष वाले ट्रक, 1,99,636 तीन-अक्ष वाहन, 1,60,061 चार से छह-अक्ष वाले वाहन और 899 ओवर डाइमेंशन वाहन गुजरे हैं।

अटल सेतु पर ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली का बड़ा योगदान है। इसमें एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), फायर-रेस्क्यू वाहनों, रखरखाव टीमों और गश्त दल की तैनाती शामिल है। तीन विशेष टीमें चौबीसों घंटे ट्रैफिक की निगरानी, चिकित्सा सहायता और किसी भी रुकावट को हटाने के लिए काम करती हैं। इससे दुर्घटनाओं के खतरे कम हुए हैं और पुल पर सुरक्षा मानकों को उच्च स्तर तक बनाए रखा गया है।

अटल सेतु ने एक साल में यात्रा के अनुभव को बदल दिया है और आठ मिलियन से अधिक वाहनों को लाभ पहुंचाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान देने वाला एक प्रतीक बताया।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से तैयार हुआ था सेतु

अटल सेतु को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाया गया था। इसके निर्माण में सरकार के साथ चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। साल 2018 में इसका निर्माण शुरू किया गया था।

लार्सन ऐंड टुब्रो, आईएचआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, देवू इंजीनियरिंग ऐंड कंस्ट्रक्शन और टाटा प्रोजेक्ट ने सरकार के साथ मिलकर इस समुद्री पुल को बनाया था। इसके निर्माण की नोडल एजेंसी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉर‍िटी थी। जापान इंटरनैशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी ने इसे फंडिंग मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

अटल सेतु पर एक तरफ की यात्रा के लिए 250 रुपये का टोल देना पड़ता है, जबकि दोनों तरफ के लिए 375 रुपये खर्च करने होते हैं। मासिक पास टोल राशि का 50 गुना होगा। राज्य सरकार का कहना था कि एक साल के बाद टोल की समीक्षा की जाएगी।

करीब 17,840 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 6-लेन का यह पुल समुद्र के ऊपर 16.5 किमी और जमीन पर 5.5 किमी लंबा है। यह मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और जल्द शुरू होने वाले नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच तेज कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इसके अलावा, यह मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों तक यात्रा समय को भी कम करता है। अटल सेतु भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल है और देश में समुद्र पर बना सबसे लंबा ढांचा भी है।

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First Published - January 14, 2025 | 7:58 AM IST

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