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RBI MPC: ब्याज दर में 0.25% कटौती की उम्मीद, FY25 के आखिर तक रेपो रेट 5-5.25% तक आने का अनुमान

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RBI MPC: मांग कमजोर होने और महंगाई घटने से RBI को और दरें कम करने का मौका, आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी सपोर्ट जरूरी

Last Updated- June 04, 2025 | 11:29 AM IST
RBI

RBI MPC: RBI MPC की मीटिंग 4 जून यानी आज से शुरू हो रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 6 जून को पॉलिसी का ऐलान करेंगे। इसी बीच नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की प्रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) इस बार अपनी रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकती है। साथ ही, आने वाले महीनों में और भी कटौतियों का संकेत मिल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डिमांड यानी मांग धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। क्रेडिट ग्रोथ (कर्ज वितरण की रफ्तार), ऑटो बिक्री, रियल एस्टेट की बिक्री और घरेलू इनकम सभी में गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं महंगाई भी नरम हो गई है और पिछले तीन महीनों में औसतन 4% से नीचे रही है।

रुपया स्थिर, डॉलर कमजोर

विदेशी मोर्चे पर भी भारत के लिए हालात बेहतर हैं। डॉलर की कमजोरी और चालू खाते (BoP) की स्थिति सुधरने से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपया दोनों मजबूत हैं। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती के लिए न केवल गुंजाइश है बल्कि इसकी जरूरत भी है। RBI ने हाल के महीनों में सिस्टम में अच्छी मात्रा में लिक्विडिटी यानी नकदी डाली है। मई में ₹1.7 लाख करोड़ और जून की शुरुआत में ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक की लिक्विडिटी सिस्टम में थी। ऐसे में केंद्रीय बैंक फिलहाल और नकदी सपोर्ट का ऐलान नहीं करेगा, लेकिन ज़रूरत पड़ी तो लचीला रुख अपना सकता है।

आर्थिक विकास पर खतरा, पॉलिसी सपोर्ट जरूरी

नुवामा का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार हाल के महीनों में कमजोर हुई है। कंपनियों की आमदनी और मुनाफा घटा है, लोगों की आमदनी की रफ्तार धीमी है, क्रेडिट ग्रोथ कमजोर है और सरकार की फिस्कल नीति सख्त होती जा रही है। ऑटो और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में भी मंदी दिख रही है। अप्रैल में हेडलाइन महंगाई घटकर 3.2% पर आ गई, जो जुलाई 2019 के बाद सबसे कम है। साथ ही रुपया भी स्थिर बना हुआ है। इन दोनों वजहों से ब्याज दर में कटौती लगभग तय मानी जा रही है।

बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, RBI की मौद्रिक नीति समिति जून में ब्याज दरों में कटौती जारी रख सकती है ताकि धीमी होती घरेलू अर्थव्यवस्था को मदद मिल सके। महंगाई 4% से नीचे बनी है और जीडीपी ग्रोथ धीमी पड़ रही है, खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी नीतियों की वजह से। इसलिए, RBI ने अपनी नीति को और सहायक बनाने का संकेत दिया है, जिससे तरलता बढ़े और विकास को बढ़ावा मिले। हालांकि, अंतिम फैसला वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा, लेकिन बाजार तीसरी कटौती की उम्मीद कर रहा है।

केयरएज रेटिंग का कहना है कि अप्रैल 2025 में महंगाई दर 3.2% पर आ गई है, जो अगस्त 2019 के बाद सबसे कम है। खासकर खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में लगातार कमी से मुद्रास्फीति में नरमी आई है। रबी की अच्छी फसल और उम्मीद से बेहतर मानसून कृषि उत्पादन को बढ़ावा देंगे, जिससे खाद्य महंगाई और कम होगी। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए चुनौतियां बने हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की GDP ग्रोथ Q4 FY25 में 7.4% रही, जो उम्मीद से बेहतर है, लेकिन निजी निवेश और निर्माण क्षेत्र की धीमी रिकवरी चिंता का विषय है। केयरएज का मानना है कि RBI जून 2025 में रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है और मौद्रिक नीति में सहायक रुख बनाए रखेगा ताकि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिल सके। बेहतर लिक्विडिटी और कम कॉल मनी रेट के कारण बड़ी कटौती की संभावना कम है, लेकिन अगर आर्थिक वृद्धि कमजोर होती है तो RBI और भी कदम उठा सकता है।

कैसा रहेगा आगे का रुख

RBI ने इस साल पहले ही दो बार दरें घटाई हैं और अब भी स्थिति ऐसी है कि और कटौती की जा सकती है। नुवामा को उम्मीद है कि इस मौद्रिक नीति चक्र में रेपो रेट 5% से 5.25% के बीच लाया जा सकता है।

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First Published - June 4, 2025 | 11:00 AM IST

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