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बीमा सेक्टर में एक्चुअरीज की भारी डिमांड: IFRS और RBC के नए नियमों ने बढ़ाई पेशेवरों की जरूरत

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बीमा नियमों में IFRS और RBC जैसे बड़े बदलावों के कारण भारत में एक्चुअरीज की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे इस क्षेत्र में टैलेंट की कमी देखी जा रही है

Last Updated- March 03, 2026 | 10:15 PM IST
insurance sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

उद्योग के जानकारों ने कहा कि बीमा उद्योग इंटरनैशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स (आईएफआरएस) और जोखिम आधारित पूंजी (आरबीसी) फ्रेमवर्क में बदलाव की तैयारी कर रहा है, ऐसे में एक्चुअरी की मांग बढ़ गई है। अभी इसकी आपूर्ति कम है। 

इस समय भारत की बीमा कंपनियां इंडियन जनराली द्वारा स्वीकार्य अकाउंटिंग गतिविधियों (इंडियन जीएएपी) के फ्रेमवर्क का पालन करती हैं। आगे चलकर यह उद्योग धीरे धीरे इंड एएस 117 या आईएफआरएस 17 में बदलाव पर काम कर रही हैं क्योंकि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने वित्त वर्ष 2027 से सभी कंपनियों के लिए आईएफआरएस अनिवार्य कर दिया है।

नियामक इस उद्योग को मौजूदा फैक्टर आधारित सॉल्वेंसी फ्रेमवर्क से आरबीसी फ्रेमवर्क की ओर ले जाने की भी तैयारी कर रहा है। इन बदलावों के लिए वित्त विभाग और ऑडिट विभाग में कोर एक्चुअरी कौशल की जरूरत होगी, जिसमें कुछ एक्चुअरी वित्तीय अधिकारी की भूमिका में जा रहे हैं।  ऑडिटरों को एक्चुअरी की भर्ती करने या उनसे सहयोग लेकर काम करने की जरूरत पड़ सकती है,  क्योंकि एकाउंटेंटों और एक्चुअरीज दोनों को प्रोफॉर्मा की समीक्षा करने की जरूरत होती है। 

इस वजह से बदलाव की तैयारी के लिए बीमा कंपनियां और एक्चुअरी लेने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योग को एक्चुअरी मिलने में दिक्कत हो रही है और इस सेग्मेंट में नौकरी छोड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है। 

न्यू इंडिया एश्योरेंस की चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गिरिजा सुब्रमण्यम ने कहा, ‘मांग बहुत ज्यादा है। बदलती वित्तीय व्यवस्था के कारण यह पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है। हम आरबीसी और आईएफआरएस वित्तीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं और एक्चुअरी को बीमा के सभी पहलुओं- सेवा के चयन, अकाउंटिंग, रिजर्विंग और आखिर में बैलेंस शीट कैसे बनती है, इसमें ज्यादा शामिल होने की ज़रूरत है। बीमा के हर हिस्से में उनकी भूमिका होती है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मांग बहुत ज़्यादा है, आपूर्ति भी ठीक है, लेकिन मुझे लगता है कि लोगों को ज़्यादा समय तक एक ही जगह पर स्थिर रहना सीखना चाहिए। आम तौर पर एक्चुअरी तेजी से एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं।’

कंपनी के पास अभी करीब 17 एक्चुअरीज हैं और वह कुछ और एक्चुअरीज की भर्ती और जो हैं उन्हें बनाए रखने के तरीकों पर विचार कर रही है। कंपनी ने आईएफआरएस और इंडियन जीएएपी दोनों पर साथ साथ काम करना शुरू कर दिया है।  

उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक एक बड़ी जीवन बीमा कंपनी में 50 से 60 एक्चुअरी की टीम होगी, जिसमें विद्यार्थी, एसोसिएट और फेलो शामिल होंगे और इनमें से 15 प्रतिशत पूर्ण अनुभवी होंगे। वहीं छोटी बीमा कंपनी में करीब 10 से 12 एक्चुअरीज होंगे।

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First Published - March 3, 2026 | 10:15 PM IST

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