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पांच वित्तीय संस्थाओं में फंसे बैंकों के एक अरब डॉलर

Last Updated- December 07, 2022 | 11:48 PM IST

भारतीय बैंकों का विदेशी बैंकों और उनकी सहयोगी इकाईयों के मार्फत संकटग्रस्त विश्व की पांच वित्तीय संस्थाओं में करीब एक अरब डॉलर का एक्सपोजर है। ये संस्थाएं हैं, वाकोविया, वाशिंगटन म्युचुअल, फोर्टिस और लीमन ब्रदर्स।


जुलाई में भारतीय बैंकों का मार्केट टू मार्केट नुकसान (एमटीएम) इस साल जुलाई माह के अंत तक 45 करोड़ डॉलर था। इस स्थिति पर करीबी नजर रख रहे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि यह नुकसान फिलहाल केवल किताबी (नोशनल) हैं और हकीकत में नुकसान तभी होगा जब वे पार्टियां पैसा नहीं दे पाएंगीं।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर वी लीलाधर ने बताया कि इसको लेकर परेशान होने की बात  नहीं है। इन संस्थाओं में चार को बेलआउट किया जा चुका है। हम इसके व्यापक प्रभावों पर नजर रख रहे हैं। बैंकों का इन संस्थाओं में सीधा कोई एक्सपोजर नहीं है। इनमें से कुछ एक्सपोजर कोलेट्रलाइज्ड डेट ऑब्लिगेशन (सीडीओ) और क्रेडिट डिफाल्ट स्वैप (सीडीएस) को है।

सीडीओ एक कांप्लेक्स डेरिवेटिव है जो बैंकों का लोन पूल है जिसका भुगतान करना या फिर रिटर्न करना जोखिम की श्रेणी पर निर्भर करता  है जबकि सीडीएस एक लोन डिफॉल्ट इंश्योरेंस पैकेज है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एमटीएम नुकसान करीब 9 करोड़ डॉलर का है जबकि प्राइवेट बैंकों  का  जुलाई के अंत तक एमटीएम नुकसान करीब 36 करोड़ डॉलर का था।

भारतीय बैंकों का दिवालिया होने के लिए आवेदन दे चुके लीमन ब्रदर्स में एक्सपोजर 33 करोड़ डॉलर का है। अन्य संस्थाओं में फोर्टिस,  वाशिंग्टन म्युचुअल, वाकोविया और एआईजी को या तो सरकार ने बेल आउट कर लिया है या फिर उनका विलय हो चुका है।

हालांकि इसके बाद भी लीलाधर मानते हैं कि भारतीय बैंकों की बेलेंस शीट के आधार पर  कुल एक्सपोजर और एमटीएम नुकसान दोनों काफी कम है।  घरेलू ट्रांजेक्शन के बारे में लीलाधर का कहना है कि फिक्स्ड इंकम  मनी मार्केट और डेरिवेटिव एसोसिएशन की मदद से आठ भारतीय बैंक  और प्राइमरी मार्केट लीमन इंट्रेस्ट रेट स्वेप में एक्सपोजर को सफलतापूर्वक सेटल करने में सफल रहे हैं।

इसमें 60,000 करोड़ रुपये का  नेशनल एमाउंट था और अभी तक नेट सेटलमेंट एमाउंट 50 करोड़ रुपये का है जो लीमन ने चुकता कर दिया था। विदेशों में अरब डॉलर के  एक्सपोजर की बात करें तो आईसीआईसीआई बैंक का अमेरिका और यूरोप के पांच संकटग्रस्त बैंकों में कुल एक्सपोजर 23 करोड़ डॉलर का  है।

जहां आईसीआईसीआई का फेनी मेई, फ्रेडी मेक और लेंड्सबंकी ऑफ आइसलैंड में कोई एक्सपोजर नहीं था, वहीं मोर्गन स्टेनली में  उसका एक्सपोजर 10 करोड़ डॉलर का था। स्टेनली अब बैंक होल्डिंग कंपनी बन गई है। इस बारे में आईसीआईसीआई बैंक का कहना है  कि उसका इन संस्थाओं में कोई भी सीधा निवेश नहीं है।

यह निवेश उसकी विदेशों में स्थिति सब्सिडरियों का है। लीमन के मामले में आईसीआईसीआई बैंक की ब्रितानी इकाई का एक्सपोजर करीब 8 करोड़ डॉलर का है। इसके मुकाबले उसने 12 करोड़ डॉलर की प्रोविजनिंग कर  रखी है। उसे 2.8 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त प्रोविजनिंग करनी होगी। यह ध्यान में रखते हुए कि 50 फीसदी की रिकवरी हो ही जाएगी।

इससे पहले बैंक ने कहा था कि उसका ग्लोबल पेपर में एक्सपोजर 3 अरब डॉलर का है। इसमें 60 करोड़ डॉलर की मॉर्गेज समर्थित  सिक्युरिटी है जबकि 50 करोड़ डॉलर के कार्पोरेट बांड हैं।

तरलता की स्थिति जल्द सुधरेगी

मुंबई:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर वी. लीलाधर ने कहा है कि वित्तीय बाजार को तरलता की तंगहाली से अगले 15-20 दिनों में निजात मिल जाएगी।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि किसानों की कर्ज माफी के सेटलमेंट के तहत संसद ने बैंकों को 25,000 करोड़ रुपये जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह राशि जल्द ही सिस्टम में आ जाएगा। इतना ही नहीं सरकार उर्वरकों में दी जाने वाले सब्सिडी बोझ को भी आसान करने केलिए  कंपनियों को खुद नकद भुगतान करेगी।

सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत एरियर की राशि भी बैंकों को जारी करने वाली है। लीलाधर ने इस बारे में बताया कि इन सभी कदमों से बैंकों को तरलता के संकट से निजात मिलने वाली है। यह प्रकिया आज से प्रांरभ हो गई है।

रिजर्व बैंक पहले ही सीआरआर की दरों कटौती कर बैंकों के लिए नियामत पेश कर चुकी है। उसने सीआरआर को 1.5 फीसदी कम करके 7.5 फीसदी कर दिया है। इससे बैंकिंग सिस्टम में 60,0000 करोड़ रुपये आ सकेंगे। रिजर्व बैंक तरलता की तंगहाली को देखते हुए 1,000 करोड रुपये के बांडों की निलामी को पहले स्थगित कर चुकी है।

First Published - October 13, 2008 | 11:16 PM IST

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