facebookmetapixel
Gold-Silver Outlook: सोना और चांदी ने 2025 में तोड़े सारे रिकॉर्ड, 2026 में आ सकती है और उछालYear Ender: 2025 में आईपीओ और SME फंडिंग ने तोड़े रिकॉर्ड, 103 कंपनियों ने जुटाए ₹1.75 लाख करोड़; QIP रहा नरम2025 में डेट म्युचुअल फंड्स की चुनिंदा कैटेगरी की मजबूत कमाई, मीडियम ड्यूरेशन फंड्स रहे सबसे आगेYear Ender 2025: सोने-चांदी में चमक मगर शेयर बाजार ने किया निराश, अब निवेशकों की नजर 2026 पर2025 में भारत आए कम विदेशी पर्यटक, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया वीजा-मुक्त नीतियों से आगे निकलेकहीं 2026 में अल-नीनो बिगाड़ न दे मॉनसून का मिजाज? खेती और आर्थिक वृद्धि पर असर की आशंकानए साल की पूर्व संध्या पर डिलिवरी कंपनियों ने बढ़ाए इंसेंटिव, गिग वर्कर्स की हड़ताल से बढ़ी हलचलबिज़नेस स्टैंडर्ड सीईओ सर्वेक्षण: कॉरपोरेट जगत को नए साल में दमदार वृद्धि की उम्मीद, भू-राजनीतिक जोखिम की चिंताआरबीआई की चेतावनी: वैश्विक बाजारों के झटकों से अल्पकालिक जोखिम, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूतसरकार ने वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत दी, ₹87,695 करोड़ के AGR बकाये पर रोक

लीमन ने शुरू की बकाये की अदायगी

Last Updated- December 10, 2022 | 7:35 PM IST

अमेरिकी निवेश बैंक लीमन ब्रदर्स ने दिवालियापन की अर्जी देने के 6 महीने के बाद अब भारतीय कंपनी के साथ अपने सौदे का निपटान शुरू कर दिया है।
हालांकि इनका निपटान पहले से तय की गई कीमतों से कम के स्तर पर यानी कुछ छूट के साथ हो रहा है। इनमें से अधिकांश सौदों में अब भी ऐसी बकाया राशि शामिल हैं जो कंपनी के अधिग्रहण या इसमें हिस्सेदारी खरीदने के तहत भुगतान किए जाने थे।
उल्लेखनीय है कि अगस्त 2007 में लीमन ब्रदर्स ने ब्रिक्स सिक्योरिटीज के संस्थागत इक्विटी कारोबार का अधिग्रहण कर लिया था जिसमें 45 शोध विश्लेषक और कारोबारी पेशेवर शामिल थे। लीमन ने यह खरीदारी 450 करोड रुपये में की थी।
सौदे की शर्तों के तहत ब्रिक्स को ये रकम तीन किस्तों में अदा की जानी थी जिसमें तीसरी किस्त 120 करोड़ रुपये का था। सूत्रों ने कहा कि हाल में ही यह सौदा 25 फीसदी की छूट के साथ 91 करोड रुपये में पूरा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहे एक सूत्र ने कहा कि ब्रिक्स को मजबूरन कम कीमत पर इस सौदे का निपटान करना पडा क्योंकि भुगतान को लेकर काफी अनिश्चितता जुड़ी हुई थी। इसके अलावा लीमन ब्रदर्स ने एडिलवाइस की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ईसीएल फाइनैंस में भी 26 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी।
इस सौदे के पूरा होने में संदेह है क्योंकि इस सौदे की बकाया राशि का हाल तक भुगतान नहीं किया गया था। एडिलवाइस ने बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए ई-मेल का भी कोई जवाब नहीं दिया। सूत्रों का यह भी कहना है कि लीमन ब्रदर्स ने कुछ अन्य भारतीय कंपनियों के साथ 150 करोड रुपये का फाइनैंशियल कमिटमेंट भी किया है।

First Published - March 12, 2009 | 12:37 PM IST

संबंधित पोस्ट