facebookmetapixel
Advertisement
सोमनाथ भारत की अपराजित आत्मा का प्रतीक, पीएम मोदी ने विरासत और आस्था को बताया राष्ट्र की शक्तिECLGS 5.0: एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट को मिल सकती है ₹1,500 करोड़ तक की राहतRupee vs Dollar: कच्चे तेल में गिरावट से रुपया लगातार दूसरे दिन मजबूत, डॉलर के मुकाबले 94.25 पर बंदसंजय कपूर मामले में मध्यस्थता करेंगे पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़FY26 में नए निवेशकों पर चार AMC का दबदबा, आधे से ज्यादा फोलियो इन्हीं के नामEditorial: हार के बाद ममता बनर्जी की सियासत ने फिर बढ़ाया टकरावक्या UPI पर सब्सिडी खत्म करने का समय आ गया है? Tiered MDR व्यवस्था की जरूरत पर बहसनए स्वरूप में NITI Aayog और PMEAC भारत की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर समझने में बन सकते हैं मददगारSEBI ने शेयर ब्रोकरों का जोखिम सुरक्षा प्रणाली मंच ‘आईआरआरए’ बंद किया Stock Market: उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 114 अंक टूटा, निफ्टी स्थिर 

भारतीय उद्योग जगत में सुस्ती के बीच बैंकिंग क्षेत्र में चमक बरकरार

Advertisement
Last Updated- May 24, 2023 | 8:26 PM IST
Banks

बैंकिंग क्षेत्र ऐसे समय में मजबूती के साथ उभरा है जब शेष भारतीय उद्योग जगत ने वित्त वर्ष 2023 में आय में नरमी दर्ज की है। सूचीबद्ध सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ पिछले वित्त वर्ष सालाना आधार पर 39.4 प्रतिशत तक बढ़ गया था और भारत की सकल मूल्य वृद्धि (GVA) या सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इनकी भागीदारी एक साल पहले के 0.8 प्रति से बढ़कर करीब 1 प्रतिशत की नई ऊंचाई पर पहुंच गई।

सूचीबद्ध बैंकों का संयुक्त शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर 2.36 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 1.69 लाख करोड़ रुपये पर था। तुलनात्मक तौर पर, मौजूदा समय में भारत की जीवीए सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत बढ़कर 247 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, जो एक साल पहले 214 लाख करोड़ रुपये के आसपास थी। GVA अर्थव्यवस्था में तैयार सभी सामान एवं सेवाओं की वैल्यू होती है, जिसमें स​ब्सिडी और जीएसटी जैसे अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं होते। स​ब्सिडी का कुल अप्रत्यक्ष कर संग्रह (tax collection) वित्त वर्ष 2023 में एक साल पहले की तुलना में 22.9 प्रतिशत तक बढ़ गया, जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था में वस्तु एवं सेवाओं के उत्पादन के मुकाबले बाजार कीमत पर जीडीपी में ज्यादा तेजी आई।

2022-23 में बैंकों की आय में भारी तेजी को ब्याज आय में तेज वृद्धि से मदद मिली थी। हमारे नमूने में शामिल बैंकों की संयुक्त सकल ब्याज आय वित्त वर्ष 2023 में सालाना आधार पर 22.1 प्रतिशत तक बढ़कर 14.1 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 11.55 लाख करोड़ रुपये थी। इसकी वजह से, बैंकों की ब्याज आय वित्त वर्ष 2023 में देश की जीवीए के 5.7 प्रतिशत के बराबर रही, जो पिछले सात वर्षों (वित्त वर्ष 2021 को छोड़कर) में सर्वा​धिक है। वित्त वर्ष 2021 में मौजूदा भाव पर जीवीए कोविड-19 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से 1 प्रतिशत तक घट गई थी।

बैंकों को खासकर व्य​क्तिगत ऋणों दो अंक की वृद्धि, और पिछले साल उधारी दरों में तेजी का लाभ मिला। बाद में बैंकों को ऋणों पर ज्यादा ब्याज वसूलने की अनुमति मिली, जिससे उनकी ब्याज आय और आय में मजबूती आई।

Also read: RBI गवर्नर दास ने कहा, 2,000 के नोट को वापस लेने की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी होगी

बैंकों के मुनाफे को एनपीए से संबं​धित उनके प्रावधान खर्च में दो अंक तक की कमी से भी मदद मिली। NPA के लिए बैंकों का संयुक्त प्रावधान खर्च वित्त वर्ष 2023 में एक साल पहले के मुकाबले 18.2 प्रतिशत घटकर 1.37 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2025 के बाद से सबसे कम है।

वित्त वर्ष 2023 में बैकों की सकल ब्याज आय में प्रावधान और अन्य आक​स्मिक खर्च का महज 7.6 प्रतिशत योगदान रहा, जो एक साल पहले 11.1 प्रतिशत था।

Also read: फ्लेक्सी स्टॉफिंग में लगातार दूसरी बार चौथी तिमाही में ​गिरावट

कई विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2024 में शेष भारतीय उद्योग जगत की तुलना में बैंकों की आय तेज गति से बरकरार रहने का अनुमान है।

Advertisement
First Published - May 24, 2023 | 8:26 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement