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एआरसी ने एनपीए की बिक्री को लेकर नए नियमों की मांग की

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Last Updated- December 07, 2022 | 7:47 PM IST

एसेट कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट की बिक्री के संबध में दिशा-निर्देश तय करने के लिए कहा है।


एक आईबीए अधिकारी ने कहा कि एनपीए के वैल्युएशन और कीमतों को लेकर तय प्रक्रिया में निरंतरता का अभाव है, चाहे भुगतान नकद हो या सिक्योरिटी रिसिप्ट जारी करके या फिर दोनों ही तरह से क्यों न किया जाए।

उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कार्यसमिति बनाने का मकसद कुछ निश्चित दिशा-निर्देश तय करना है जोकि एनपीए की एआरसी को बोली के समय बैंकों द्वारा पूरा किया जाना है। सभी एआरसी और बैंक वैल्युएशन और प्राइसिंग में एकरूपता लाने का प्रयास कर रही हैं।

अधिकारी ने कहा कि हालांकि रिजर्व बैंक ने लोन एसेट की एआरसी को बिक्री पर अपने दिशा-निर्देश जारी किए हैं लेकिन बैंक अलग से अपने दिशा-निर्देशों का पालन कर रहें हैं। आईबीए के मुख्य कानूनी सलाहकार एम आर उमराजी ने कहा कि कुछ मामले रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से सुलझाए जाएंगे और बचे हुए कुछ मुद्दों को सरकार के सामने संसोधन के लिए रखा जाएगा।

इंटरनेशनल एसेट रिकंस्ट्रसन कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीरेन्द्र कुमार केअनुसार खराब वैल्युएशन और सूचना के अभाव के कारण कई नीलामी नहीं हो पाई और एसेट, कुल परिचालन में शामिल हुए फंड और बिक्री की प्रक्रिया की जानकारी आवश्यक है।

एआरसी एसेट को डिस्काउंट पर खरीदती है जोकि लोन की वास्तविक कीमत से 75 प्रतिशत अधिक हो सकती है। डिस्काउंट में बदलाव आता रहता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि उधार लेने वालों ने कितने समय से ब्याज का भुगतान नहीं किया है।

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First Published - September 4, 2008 | 9:41 PM IST

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