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8 बैंकों ने किया ऋण जोखिम का खुलासा

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Last Updated- December 11, 2022 | 11:56 PM IST

दूसरी तिमाही के लिए नतीजे घोषित करने वाले आठ बैंकों ने नियामकीय पैकेज के दूसरे चरण के तहत पुनर्गठित ऋण जोखिमों में करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी व्यक्तिगत ऋणों का दिखाया है जिससे कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के भयानक असर का पता चलता है। शेष 20 फीसदी में कारोबार में उपयोग करने के लिए व्यक्तियों को दिए गए ऋण और एमएसएमई को दिए गए ऋण का हिस्सा है। एकबारगी पुनर्गठन के दूसरे चरण (ओटीआर 2.0) में कुल पुनर्निर्धारण 27,708 करोड़ रुपये का है।    
पुनर्गठन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक का है। इसकी हिस्सेदारी 17,395 करोड़ रुपये का है। इसके बाद एक अन्य निजी बैंक आईसीआईसीआई का स्थान है। लेकिन इन दो बैंकों के बीच का फासला काफी अधिक है।
बैंकरों का कहना है कि मई 2021 में बनाई गई पुनर्गठन योजना मुख्य तौर पर ऐसे परिवारों और व्यक्तियों के लिए थी जिन्हें नौकरी गंवाने, वेतन में कटौती के कारण वित्तीय दबाव झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही इस योजना में उन छोटे और सूक्ष्म कारोबारियों को शामिल किया गया था जिन्हें नकदी प्रवाह में रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। इसीलिए कुल पुनर्गठित पूल में व्यक्तियों को दिए गए ऋण की हिस्सेदारी अधिक है।
एसएमई को दिए गए ऋण की रकम शायद इसलिए कम नजर आ रही है क्योंकि उन्हें आपात क्रेडिट जैसी सुविधाएं दी गई थी।
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने नोट में कहा कि ऋण अदायगी में मोहलत और इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) ने उधारकर्ताओं को राहत मुहैया कराई और पुनर्गठन के लिए जरूरत को कम किया।उक्त सकारात्मक उपायों के बावजूद कोविड के कारण कर्जदारों के नकदी प्रवाहों पर असर पड़ा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) खंडों में कर्जदारों के लिए बकाया लोन बुक उच्च बना हुआ है। इसके उलट कॉर्पोरेट खंड में बकाया ऋण या तो स्थायी रहे हैं या कम हुए हैं।
आईडीबीआई बैंक के उप प्रबंध निदेशक सुरेश खातनहर ने कहा कि एकबारगी पुनर्गठन सभी बोर्ड में नहीं हुए हैं। इस पूल से चूक की संभावना कम है जिसकी वजह है कि पुनर्निर्धारण को अंतिम रूप देने और अर्थव्यवस्था में उलटफेर के समय पर सावधानीपूर्वक आकलन किया गया जिससे कमाई की संभावना में सुधार हुआ।
उन्होंने कहा कि पुनर्गठन के लिए ऐसे कर्जदारों को चुना गया है जो वास्तव में कोविड से प्रभावित हुए थे और वापसी करने की क्षमता रखते थे। उन्हें एक सहारे की जरूरत थी। इसे अंजाम दिया गया है और यहां पर अधिक चुनौती नहीं है।इसके अलावा अर्थव्यवस्था ऊपर की ओर जा रही है और खातों में नकदी का प्रवाह आरंभ हो चुका है।

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First Published - October 27, 2021 | 11:20 PM IST

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